जयपुर. राजस्थान के बड़े भूभाग को नेपाल की नदियों और बर्फ के पानी की सौगात देने की तैयारी है। करीब ढाई हजार किलोमीटर बहता हुआ पहाड़ों का पानी राजस्थान में जयपुर के पास से होता हुआ सीकर, झूंझुनू, चूरू, बीकानेर, जालौर, सिरोही जैसे सात जिलोंं से होकर गुजरात में प्रवेश करेगा।
इससे राजस्थान के करीब एक हजार किलोमीटर हिस्से और दो करोड़ जनता को पीने का साफ पानी मुहैया होगा। आगे चलकर यह रिवर लिंक इंदरा गांधी कैनाल के समानांतर हो जाएगा। राजस्थान में बचा पानी आगे गुजरात में साबरमती नदी के माध्यम से कई जिलों को तिरोहित करता हुआ कच्छ के रण में मिल जाएगा।
नेशनल प्राधिकरण की फिजीकल रिपोर्ट तैयार : नेपाल से पानी को शारदा लिंक के माध्यम से यमुना होते हुए राजस्थान से जोड़ने के प्रोजेक्ट का केंद्र सरकार की तरफ से फिजीकल सर्वे कराया गया। नेशनल वाटर डवलपमेंट अथॉरिटी ने फिजीकल रिपोर्ट में इसे सही माना है। अब राजस्थान के जल संसाधन मंत्री डॉ. रामप्रताप ने राजस्थान में दो जगह यमुना राजस्थान लिंक (हरियाणा बॉर्डर) से साबरमती राजस्थान लिंक (गुजरात बॉर्डर) तक के प्रोजेक्ट की विस्तृत डीपीआर बनाने और काम को गति देने को कहा है।
यह रहेगा वाटर लिंक रूट
नेपाल की नदियों और पहाड़ों से बहकर आने वाले पानी को नेपाल-भारत बॉर्डर पर पंचेश्वर बांध में एकत्रित किया जाएगा। टिहरी की तरह बॉर्डर पर यह बड़ा बांध होगा।
इसकी प्रोजेक्ट की लागत 50 हजार करोड़ रुपए आएगी। पंचेश्वर बांध से पानी शारदा नदी होते हुए उत्तरप्रदेश में दिल्ली के पास यमुना में गिराया जाएगा। यमुना का पानी हरियाणा होते हुए झूंझुनू जिले से राजस्थान में प्रवेश करेगा। राजस्थान में सात जिलों से होता हुआ जालौर-सिरोही जिलों के बीच एक प्वाइंट से गुजरात में प्रवेश करेगा।
पंचेश्वर बांध का काम शुरू, हमारा काम धीरे
पंचेश्वर बांध बनाने का 50 हजार करोड़ का काम दोनों देशों ने एमओयू करके शुरू भी कर दिया है। इसके साथ ही राजस्थान सहित गुजरात और अन्य प्रदेशों में भी रिवर लिंक का काम होना है। इसकी लागत 40 हजार करोड़ रुपए आएगी। इसकी फिजीकल रिपोर्ट के बाद कार्य शुरू किया जाना था।
8 फरवरी को मंत्री ने केंद्र को राजस्थान सहित अन्य राज्यों के लिंक कार्य को जल्द शुरू करने को कहा। जल संसाधन के चीफ इंजीनियर विनोद शाह ने बताया कि रिवर लिंक का काम पूरा हो तो पंचेश्वर से पानी आने तक यमुना का पानी राजस्थान को मिलता रहेगा।