जयपुर. शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की प्लानिंग पूर जोरों से चल रही है। नगर निगम ने इसके लिए शहर को दो हिस्सों में बांटा है। वजह- स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर बेहतर तरीके से काम बताया है। अब बात 607 एकड़ एरिया की, जिसे स्मार्ट सिटी बनाने की जिम्मेदारी नगर निगम ने ली है।
ये चारदीवारी है। इसमें भी घाटगेट और रामगंज बाजार। पूरी चारदीवारी में सबसे बड़ी समस्या अतिक्रमण। चिह्नित एरिया में मुख्य सड़कों पर फुटपाथ व्यापारियों का कब्जा है। नो-वेन्डिग जोन के बोर्ड के नीचे व आसपास थड़ी-थेड़े लगते हैं। गलियों में अवैध कॉम्प्लैक्स व बाजारों की पार्किंग होती है।
अब फिर बात नगर निगम की- चारदीवारी के हालात आज से ऐसे नहीं हैं। नगर निगम क्या नहीं जानता? कितने अतिक्रमण हटे, कितने जमे हैं, यह भी पता नहीं।... और उसी नगर निगम को इन्हीं बाजारों को स्मार्ट बनाना होगा। चुनौती बड़ी है। नगर निगम से नाउम्मीद जनता इस बार फिर उम्मीद लगाए है।
हैरिटेज, फिर कंजस्टेड...अब स्मार्ट हो : शहर के जिस 607 एकड़ एरिया को स्मार्ट सिटी के लिए चयन किया गया है। उसमें अल्बर्ट हॉल से चौड़ा रास्ता, बापू बाजार, जौहरी बाजार, बड़ी चौपड़, सिरह ड्योढ़ी बाजार, चांदी की टकसाल व इससे लगता हुए आसपास का एरिया आता है। इसे लिए भी महत्व दिया जा रहा है क्योंकि इसी हिस्से में पर्यटकों की आवाजाही सबसे ज्यादा है। जबकि इसी एरिया में सबसे ज्यादा अतिक्रमण हैं।
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