जयपुर. किसी भी सरकार का चेहरा उसके मंत्री होते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से राज्य सरकार के चार ताकतवर मंत्री अपने ही बयानों से खुद की बेबसी दर्शा रहे हैं। ताजा मामला विकासमंत्री राजपाल सिंह से जुड़ा है। उन्होंने सोमवार को बयान दिया कि नियमन में पैसे का लेन-देन होता है।
हैरत की बात है कि बयानों में ये मंत्री जितनी ताकत दिखा रहे हैं, अपने ही विभागों में ये उतने ही नाकाम नजर आ रहे हैं। विभागों में भ्रष्टाचार रोकने और कार्यशैली में बदलाव की जिम्मेदारी इन्हीं की है। लेकिन बयान देने के बाद इन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया जिससे विभाग में कोई सुधार दिखे। जिन स्थितियों के कारण मंत्रियों को बयान देने के लिए मजबूर होना पड़ा, वो वजह अब भी वैसी ही है।
गृहमंत्री हों, चाहे चिकित्सा मंत्री, परिवहन हों या यूडीएच मंत्री, बीते दिनों में इनके ऐसे बयान आए हैं जो खुद के महकमों में प्रशासनिक पकड़ और प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं होने के संकेत दे रहे हैं।
भास्कर ने पुरानी सरकार के मंत्रियों से बात की तो सामने आया कि मंत्री यदि अपने विभाग के खिलाफ बयानबाजी पर उतरे तो मान लेना चाहिए कि विभाग में उसका इकबाल कायम नहीं रहा।
ये बोले पिछली सरकार के मंत्री- दोहरी मानसिकता लेकर चलेंगे तो ऐसा ही होगा: बेनीवाल
विभाग पर अपनी पकड़ बनाने के लिए मंत्री अपना समय दें और अफसरों की जिम्मेदारी तय करें तो ऐसे बयान देने की जरूरत नहीं पड़े। दोहरी मानसिकता लेकर यदि चलेंगे तो स्थितियां ऐसी ही रहेंगी। कोई मंत्री यदि एक तरफ अपने एजेंडे पर काम करने के लिए अफसरों को खुद प्रोत्साहित करे और दूसरी तरफ पब्लिक में इमानदारी का दिखावा करे तो फिर विभागीय अफसरों में निरंकुशता आएगी ही। –वीरेंद्र बेनीवाल, पूर्व परिवहन मंत्री
लाचार मंत्री भड़ास ही निकालेंगे: धारीवाल
जब मंत्री व्यवस्थाओं में सुधार नहीं करे। ऊपर से संरक्षण प्राप्त अधिकारियों द्वारा जब मंत्रियों की अनदेखी की जाए। तो फिर ऐसे लाचार मंत्री, भड़ास नहीं निकालेंगे तो क्या करेंगे? हमारी सरकार में ऐसा कभी देखने-सुनने को नहीं मिला कि मंत्री को सार्वजनिक रूप से ऐसी बयानबाजी करनी पड़ी हो। –शांति धारीवाल, पूर्व गृह एवं नगरीय विकास मंत्री
बयानों में सख्त, विभागों में बेबस
परिवहन मंत्री : आरटीओ में लाइसेंस टेस्ट में कोई फेल ही नहीं होता
- आरटीओ में कोई फेल नहीं होता, वाहन हो या लोग, सब लाइसेंस टेस्ट पास कर जाते हैं
किया कुछ नहीं : मंत्री ने भ्रष्टाचार की बात की, लेकिन न तो आरटीओ को कोई गाइडलाइन दी गई, न कोई जांच करवाई गई।
सीएम का मंत्रियों पर विश्वास नहीं : गहलोत
मंत्री जिस प्रकार से बोल रहे हैं और मुख्यमंत्री उन पर ध्यान नहीं दे रही हैं, इससे लगता है कि मुख्यमंत्री का अपने मंत्रियों पर विश्वास नहीं है। –अशोक गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री
जीरो टोलरेंस भ्रष्टाचार पर काम : परनामी
मुख्यमंत्री का साफ कहना है कि हम जीरो टोलरेंस भ्रष्टाचार की नीति पर सरकार चलाएंगे। हमारे मंत्री और सरकार इसी नीति पर काम कर रहे हैं। -अशोक परनामी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष
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