जयपुर

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होटल-टूरिज्म लॉबी के दबाव फैसला!, मानसून में बंद नहीं होगा रणथंभौर नेशनल पार्क

होटल टूरिज्म लॉबी के दबाव के कारण रणथंभौर में फुल-डे सफारी की छूट देने के बाद अब बाघों को उन्हीं के घर में खतरे में डालने की तैयारी कर ली गई है।

Dainik Bhaskar

Jun 20, 2017, 05:42 AM IST
टाइगर रिजर्व जुलाई से सितंबर महीने तक बंद रहते हैंक्योंकि बाघों का यह प्रजनन काल है। फाइल फोटो। टाइगर रिजर्व जुलाई से सितंबर महीने तक बंद रहते हैंक्योंकि बाघों का यह प्रजनन काल है। फाइल फोटो।
जयपुर. होटल टूरिज्म लॉबी के दबाव के कारण रणथंभौर में फुल-डे सफारी की छूट देने के बाद अब बाघों को उन्हीं के घर में खतरे में डालने की तैयारी कर ली गई है। नेशनल पार्क के 1 से 5 नंबर तक के अहम और वीआईपी समझे जाने वाले टाइगर जोन को 12 महीने खोलने का निर्णय हो गया है। यही नहीं राज्य के सभी टाइगर रिजर्व पर्यटन के लिए अब कभी बंद नहीं होंगे। गौर करें कि टाइगर रिजर्व मानसून सीजन जुलाई से सितंबर महीने तक बंद रहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि बाघों का यह प्रजनन काल है। इस दौरान बाघों को एकांत पसंद है। पर्यटकों को भी बाघों से दूर रखा जाता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में वे हमला भी कर सकते हैं।
जंगल के इस नियम के ठीक उलट राज्य के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने हाल ही में टाइगर रिजर्व के सभी फील्ड डायरेक्टरों को एक निर्देश जारी किया। इसमें स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की स्टैंडिंग कमेटी का हवाला है, जिसमें कहा गया है कि मानसून सीजन में टाइगर रिजर्व को खोला जा सकता है।
साथ ही आदेश में यह भी जिक्र है कि पार्क खोलने से पहले ‘नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी’ (एनटीसीए) के 18 अगस्त 2015 के आदेश की पालना को भी कहा गया है। इस फैसले के बाद वन्य जीवों के संरक्षण में लगे संगठनों में खलबली मची हुई है। विशेषज्ञ भी अापत्तियां जता रहे हैं। उनका मानना है कि राज्य सरकार का यह फैसला जंगल और बाघों के हित में नहीं है। सिर्फ होटल लॉबी को खुश करने के लिए किया जा रहा है।
बड़ा सवाल: क्या बाघों को खतरे में डालकर यह फैसला टूरिज्म लॉबी के दबाव में लिया गया?
एसीएस का जवाब-
एनसी गोयल कहते हैं हमारे पास होटल वालों ने सिफारिश नहीं की। इससे जंगल व शिकारियों पर निगरानी बढ़ेगी।
एनटीसीए के आदेश टूटेंगे
रणथंभौर के फील्ड डायरेक्टर वाईके साहू ने कहा- कि हम रोस्टर के हिसाब से एक-एक जोन बंद रखेंगे। बाकी बरसात के हिसाब से देखेंगे। हालांकि एनटीसीए के आदेश, जिसमें मानसून में जंगल बंद रखना था उसकी धज्जियां उड़ना तय। जिसको देश के सभी टाइगर रिजर्व मानते हैं।
जिम्मेदारों का तर्क
रोटेशन वाइज जंगल खोलेंगे। राजस्थान में केरल जितनी बारिश नहीं होती कि पूरे मानसून में जंगल बंद रखें। जिस दिन कहीं ज्यादा बारिश है तो उस एरिया को बंद रखने का फैसला फील्ड डायरेक्टर लेंगे। गजेंद्र सिंह खींवसर, वन मंत्री
सब एनटीसीए के आदेश के मुताबिक होगा। एनटीसी ने 3 से 5 माह लोकल परिस्थितियों के हिसाब से जंगल बंद रखने को कहा है, कौनसा जोन बंद किया जाएगा, इसका निर्णय फील्ड डायरेक्टर लेकर सूचित करेंगे। जीवी रेड्डी, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन
अफसरों का ध्यान सिर्फ टूरिज्म पर नहीं, बाघ संरक्षण पर हो
मानसून में शिकारियों का खतरा बढ़ जाता है। इस समय में टाइगर का प्रजनन-काल, जिसमें बाधा नहीं पहुंचे। जहां तक रणथंभौर की बात है तो वहां तो यह और जरूरी है, क्योंकि वहां जंगल के साथ ही बाहर भी हरा-भरा एरिया रहने के कारण जंगल का फर्क कम हो जाता है और बाघों के बाहर निकल ह्यूमन कनफ्लिक्ट बढ़ने का खतरा। राजेश गोपाल, राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण के पूर्व सदस्य सचिव
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टाइगर रिजर्व जुलाई से सितंबर महीने तक बंद रहते हैंक्योंकि बाघों का यह प्रजनन काल है। फाइल फोटो।टाइगर रिजर्व जुलाई से सितंबर महीने तक बंद रहते हैंक्योंकि बाघों का यह प्रजनन काल है। फाइल फोटो।
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