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मोदी का भाषण 40 करोड़ का, अब पूछ रहे- बताओ क्या बोले थे
हजाररु. हर स्कूल में खर्च हुए प्रधानमंत्री का भाषण सुनाने के लिए।
1,05,000
प्राथमिक,उच्च प्राथमिक, सैकंडरी और हायर सैकंडरी स्कूल हैं प्रदेश में।
{भाषण सुनने के लिए हर स्कूल में दो से तीन टेलीविजन सेट, बिजली की व्यवस्था के लिए इनवर्टर और डीटीएच कनेक्शन सैट किराए पर लिए गए।
{इनको लाने-ले जाने का किराया भी स्कूल प्रबंधन ने ही वहन किया।
{सैकंडरी और सीनियर सैकंडरी स्कूलों में कंप्यूटर तथा प्राथमिक उच्च प्राथमिक विद्यालयों में रेडियो हैं लेकिन किराये के टेलीविजन का इस्तेमाल किया गया।
ऐसे में चार हजार रुपए प्रति स्कूल के हिसाब से सरकारी स्कूलों में 40 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो गए।
मामला पहले का है, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मैं पता करूंगा।
-वासुदेवदेवनानी, शिक्षामंत्री
बजट में रही है दिक्कत
भाषणपर खर्च 40 करोड़ का राज्य बजट में कोई प्रावधान नहीं था, ऐसे में यह राशि कहां से आएगी, यह शिक्षा विभाग के लिए परेशानी का सबब बन गया है। इसी कारण पंचायतीराज और सर्व शिक्षा अभियान के तहत भर्ती शिक्षकों को वेतन देने में भी दिक्कत रही है।
आनंद चौधरी | जयपुर
शिक्षकदिवस पर 5 सितंबर को प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाइव भाषण सुनाने में 40 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। यह आंकड़ा शिक्षा विभाग के निर्देशों के बाद स्कूलों की ओर से लाइव भाषण पर हुए खर्चे का ब्यौरा उपलब्ध कराने के बाद सामने आया है। अब तीन माह बाद सभी एक लाख पांच हजार स्कूलों से प्रधानमंत्री के उस भाषण की जानकारी भी मांगी गई है। स्कूलों से पूछा गया है कि मोदी ने पांच सितंबर को क्या बोला था? लाइव भाषण की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। कई स्कूलों ने पांच-पांच पेज में भाषण का ब्यौरा दिया है तो कुछ स्कूलों की ओर से अभी भाषण का ब्यौरा तैयार किया जा रहा है। इंटरनेट, अखबार, शिक्षक छात्रों की मदद से मोदी के भाषण का विवरण तैयार किया गया। हालांकि, शिक्षा विभाग की ओर से यह लगातार प्रचारित किया जा रहा था कि स्कूलों को प्रधानमंत्री का भाषण सुनना अनिवार्य नहीं, बल्कि ऐच्छिक है। शिक्षा विभाग के आला अफसर अब इस मामले में कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं। भास्कर ने जब उनसे खर्च और भाषण की सूचना मांगे जाने के संबंध में पूछताछ की तो उन्होंने कहा कि इस बारे में शिक्षा मंत्री ही जव