निलंबित एसीई ने जारी कर दिया वर्कऑर्डर
बड़ा पद पाते ही निलंबन, पर कुर्सी नहीं छोड़ी : गोयलनवंबर 2012 में एक्सईएनसे अधीक्षण अभियंता और 15 सितंबर 2014 को एडिशनल चीफ इंजीनियर बने। उसके ठीक 17 दिन बाद 2 अक्टूबर को निलंबन आदेश जारी हुआ, लेकिन गोयल ने कुर्सी नहीं छोड़ी और 16 अक्टूबर को टोंक जिले में प्रमुख सड़कों के 4.53 करोड़ रु. के वर्क ऑर्डर जारी कर दिए। जबकि सड़कों के टेंडर की चीफ इंजीनियर ने मंजूरी 17 सितंबर को ही दे दी थी।
^विभाग के आला अफसरों को आदेश आते ही गोयल को तुरंत बताना था। ये बात सही है, लेकिन मुझे भी यह आदेश 10 या 12 अक्टूबर को मिला। उसके बाद गोयल को दिया गया। -आरकेगुप्ता, चीफइंजीनियर, पीडब्लूडी
^हां मैं राशि के साथ गाड़ी में पकड़ा गया था, लेकिन वह मेरी खुद की थी। निलंबन का आदेश उसी दिन नहीं मिलता। 2 अक्टूबर को आदेश नहीं मिला। आदेश पहुंचने में कई दिन लग जाते हैं। 31 अक्टूबर को ऑर्डर मिला। मुझे किसी ने काम करने से रोका ही नहीं। -जीएनगोयल, निलंबितएडिशनल चीफ इंजीनियर
^चार साल पहले गोयल को निलंबित या एपीओ क्यों नहीं किया, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। मैं बाद में आया। लेकिन 2 अक्टूबर को निलंबन के 14 दिन बाद भी वर्क ऑर्डर जारी कैसे किया, इसकी जिम्मेदारी चीफ इंजीनियर की है। उनसे स्पष्टीकरण लेंगे। -आरपीखंडेलवाल, सेक्रेटरी,पीडब्लूडी
विभाग ने गोयल के लिए इन चार नियमों को ताक पर रखा
}एसीबी की कार्रवाई के तुरंत बाद निलंबित या एपीओ नहीं किया।
} चार्जशीट देने और विभागीय जांच की कार्रवाई नहीं
} गोयल को एनआरएचएम से मूल विभाग में शिफ्ट तक नहीं किया
} फील्ड पोस्टिंग नहीं देनी थी, लेकिन लगातार दी गई
एनआरएचएम में रहते हुए पकड़े गए थे :
गोयल2010 में अलवरमें एनआरएचएम में डेपुटेशन पर थे। एक्सईएन की हैसियत से सीएचसी और पीएचसी निर्माण में भारी धांधली की शिकायतें मिली तो एसीबी ने जाल बिछाया। एक दिन सरकारी गाड़ी में अलवर से जयपुर आते वक्त रुपयों से भरे थैले के साथ पकड़ लिया। गोयल जवाब नहीं दे पाए कि उनके पास मिले 87 हजार रु. कहां से आए। एसीबी ने विभाग ने अभियोजन की स्वीकृति मांगी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
डूंगरसिंह राजपुरोहित | जयपुर
पीडब्लूडीमें भ्रष्टाचार को कितनी पनाह मिलती है, वरिष्ठ इंजीनियर जीएन गोयल का केस इसका उदाहरण है। एक्सईएन गोयल को एसीबी ने 87 हजार रु. के साथ पकड़ा था। माम