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रंगकर्मी अनिता प्रधान ने गोपीजी भट्ट संगीत समारोह में दी प्रस्तुति
तमाशासाधक गोपीजी भट्ट की स्मृति में परंपरा नाट्य समिति की ओर से आयोजित किए जा रहे तीन दिवसीय संगीत समारोह का दूसरा दिन कथक नृत्य प्रस्तुतियों को समर्पित रहा। इस दिन कथक नृत्यांगना निधि भट्ट, वर्षा कुमावत, नीति भट्ट और अनिता प्रधान ने कथक की बेहतरीन लय, ताल और भावों से सराबोर प्रस्तुतियों से गोपीजी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
घूंघट से निकले कथक के भाव
इन कलाकारों ने भी दर्शाई कला
निधिभट्ट और वर्षा कुमावत ने मधुराष्टकम की प्रस्तुति से समारोह की शुरुआत की। निधि ने जयपुर घराने के कथक नृत्य का प्रदर्शन किया। उन्होंने ठाठ, आमद, पर्ण, तोड़े, टुकड़ों के बाद गत निकास के जरिए कथक की लय-ताल को प्रस्तुत किया। उन्होंने इस मौके पर गोपीजी की प्रिय शिव वंदना - रंगीला शंभू गौरां ले पधारो.. पर नृत्य कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। समारोह के अंतिम दिन सोमवार को रवींद्र मंच पर शाम 7 बजे तमाशा ‘गोपीचंद-भर्तृहरि’ का मंचन किया जाएगा।
बरसों बाद खनके अनिता के घुंघरू
दूसरेदिन के कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रंगकर्मी अनिता प्रधान की प्रस्तुति रही। अनिता ने बताया कि उन्होंने कथक नृत्य की भी विधिवत शिक्षा ली है, लेकिन पिछले करीब दस वर्षों से वे इस नृत्य विधा से दूर थीं। बरसों बाद कथक की लय थामने का अनुभव रोमांचकारी रहा। उन्होंने इस मौके पर बिंदादीन महाराज की ठुमरी छेड़ो छेड़ो ना कन्हाई पर आधारित नृत्य और कथक नृत्य की तकनीक का जिस मनोयोग से प्रदर्शन किया उसे देखकर लगा ही नहीं कि वो इतने बरसों बाद कथक कर रही हैं। इस मौके पर घूंघट की गत में उनका भाव पक्ष और तिहाइयों के प्रदर्शन में उनका सम पर बनकर आने का अंदाज खास रहा।
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