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कॉलेजों में भी हों एनिमल वेलफेयर एक्टिविटीज
केंद्रीयमहिला बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने रविवार को एनिमल वेलफेयर से जुड़ी संस्थाओं को सिर्फ नसीहत दी, बल्कि इस मिशन से ज्यादा से ज्यादा लोगों और कॉर्पोरेट्स को नहीं जोड़ पाने के लिए फटकार भी लगाई। मौका था फियापो की ओर से आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ‘इंडिया फॉर एनीमल्स-2014’ का।
उन्होंने कहा प्रिंसिपल्स कार्यकर्ताओं को स्कूल में घुसने की इजाजत नहीं देते हैं। अब कॉलेजों में एनिमल वेलफेयर से जुड़ी एक्टिविटी की जाएं। हिंदुस्तान में रोजाना तीन से छह हाथी मर रहे हैं। सर्कस और जू की तरह मंदिरों से भी हाथी बैन होने चाहिए। यह तभी संभव हो पाएगा, जब कॉर्पोरेट्स एनिमल वेलफेयर को अपनी सीएसआर एक्टिविटीज का हिस्सा बनाएं।
उन्होंने कहा, ब्यूरोक्रेट्स चाहे तो बदलाव ला सकते हैं। वे नई पॉलिसी या फिर पहले बनी पॉलिसी में बदलाव से 93 परसेंट तक सुधार लाने में समर्थ है, जबकि आमजन 3 परसेंट तक ही बदलाव लाने योग्य है। स्कूलों की लेबोरेटरी में सबसे ज्यादा वाइल्ड लाइफ एनीमल का उपयोग होता है। स्थानीय फॉरेस्ट ऑफिसर को सूचित करके इसे रोका जा सकता है। कॉन्फ्रेंस में मेनका गांधी ने पिटर सिंगर की लिखित किताब ‘एनिमल लिबरेशन’ के अनुवादित स्वरूप का विमोचन किया। प्राकृत भारती की ओर से प्रकाशित इस किताब को कालाडेरा स्थित जूलॉजी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर एंड हैड डॉ. बी.के. शर्मा ने अनुवाद किया है। मेनका गांधी ने दैनिक भास्कर के ‘एक पेड़ एक जिंदगी’ अभियान की सराहना की। उन्होंने होटल क्लार्क्स आमेर में कचनार का पौधा लगाया। इस अवसर पर टिमी कुमार, पीपुल्स फॉर एनीमल के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू, सूरज सोनी और चाकसू विधायक लक्ष्मीनारायण मौजूद थे।
पौधा लगाकर पानी देतीं केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी।