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प्रमुख खरीफ फसलों की पैदावार घटने का अनुमान
मानसूनके आगमन में करीब दो सप्ताह की देरी और बुवाई के बाद लंबे अंतराल से बारिश के कारण इस साल राज्य में सभी प्रमुख खरीफ फसलों का उत्पादन घटने का अनुमान है। खरीफ फसलों का रकबा भी लगभग 17% घटकर करीब 138 लाख हैक्टेयर रहने की आशंका है।
राजस्थान कृषि निदेशालय के प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक मौजूदा खरीफ सीजन में बाजरा, ग्वार, मूंगफली, मूंग मोठ के उत्पादन में 16 से 53 फीसदी तक गिरावट संभव है। मक्का और उड़द ही ऐसी खरीफ फसलें है, जिनका उत्पादन पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ा ज्यादा होगा। निदेशालय के मुताबिक प्रदेश के कई इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण ग्वार का उत्पादन 53 फीसदी घटकर 13.29 लाख टन रह जाने अनुमान है। पिछले खरीफ सीजन में प्रदेश में 28.61 लाख टन ग्वार की पैदावार हुई थी। बुवाई के अभी तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में इस साल 32.13 लाख हैक्टेयर में ही ग्वार की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल 50.70 लाख हैक्टेयर में पैदावार की गई थी। इस तरह ग्वार का रकबा करीब 32 फीसदी घट गया। बाजरा की पैदावार में लगभग 40% गिरावट का अनुमान है। पिछले खरीफ सीजन में प्रदेश में 44.13 लाख हैक्टेयर में 41.17 लाख टन बाजरे का उत्पादन हुआ था, जबकि इस वर्ष बारिश की कमी के कारण 40.94 लाख हैक्टेयर में 24.83 लाख टन पैदावार का अनुमान है। बुवाई के बाद लंबे अंतराल तक बारिश नहीं होने से पौधों के पत्ते पीले पड़ने से मूंगफली की पैदावार 32 फीसदी तक घटने का अनुमान है। पिछले खरीफ सीजन में 4.62 लाख हैक्टेयर में 9 लाख टन मूंगफली का उत्पादन हुआ था, लेकिन इस बार 4.01 लाख हैक्टेयर में 6.75 लाख पैदावार संभव होगी। इस वर्ष सोयाबीन का उत्पादन भी पिछले वर्ष के 9.74 लाख टन के मुकाबले 9.67 लाख टन ही बैठने की संभावना है।
कई फसलों की दुबारा बुवाई का भी असर
पश्चिमी राजस्थान समेत कई इलाकों में बारिश कम होने तथा कई फसलों की दुबारा बुवाई से इस वर्ष खरीफ फसलों की पैदावार में कमी संभव है। फसलों को समय से पानी नहीं मिलने के कारण कई फसलों में रोग लग गया था। इसका पैदावार पर असर होगा। खरीफ पैदावार के प्रारंभिक अनुमानों में बदलाव संभव है। खरीफ फसलों की पैदावार के तीन बार अनुमान लगाए जाते हैं।
-अतरसिंह मीणा, उपनिदेशक (सूचना), राजस्थान कृषि निदेशालय