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जेडीए इंस्पेक्टर पर 13 लाख की रिश्वत का आरोप, जांच एएसआई को

7 वर्ष पहले
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जयपुर|जेडीए कीप्रवर्तन शाखा में तैनात इंस्पेक्टर भोपाल सिंह द्वारा पृथ्वीराज नगर में मकान नहीं तोड़ने की एवज में लोगों से 13 लाख रुपए लेने का मामले की जांच आरपीएस स्तर के अधिकारी से करवाने की बजाय मानसरोवर थाने के एक एएसआई स्तर के पुलिसकर्मी से करवाई जा रही है। ऐसे में एएसआई (जांच अधिकारी) मदरूप ने रैंक में अपने से बड़े आरोपी अफसर भोपाल सिंह के खिलाफ हुई शिकायत की पिछले एक माह से फाइल खोलकर भी नहीं देखी। उधर इस मामले में भोपाल सिंह का कहना है कि सभी आरोप गलत है। जांच में सबकुछ सामने जाएगा।

दरअसल मई 2014 में गजसिंहपुरा कुंती विहार में रहने वाले एक दर्जन लोगों ने जेडीए आयुक्त को लिखित में शिकायत की थी प्रवर्तन शाखा में तैनात इंस्पेक्टर भोपाल सिंह ने उनसे मकान तोड़ने की धमकी देकर करीब 13 लाख रुपए ले लिए हैं। शिकायत के बाद जेडीए ने जुलाई 2014 में डिप्टी एसपी नवी शेर खां को मामले की जांच करने के आदेश दिए थे। नवी शेर खां ने कॉलोनी में रहने वाले लोगों के बयान दर्ज किए थे। इनमें किसी ने पैसे देने और किसी ने पैसे नहीं देने की बात पूछताछ में बताई थी। डिप्टी एसपी नवी शेर खां ने आधी-अधूरी जांच करके फाइल वापस जेडीए के अधिकारियों को सौंप दी।

जेडीसी शिखर अग्रवाल ने प्रवर्तन अधिकारी भोपाल सिंह के भ्रष्ट आचरण की शिकायत मिलने और प्राथमिक जांच में मामला संदिग्ध पाए जाने पर डीजीपी ओमेन्द्र भारद्वाज को 14 जुलाई 2014 को आरोपी के खिलाफ जांच कर कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था। डीजीपी ने इस संबंध में पुलिस कमिश्नर को जांच के निर्देश दिए थे। जहां से मामले की फाइल जांच के लिए डीसीपी साउथ के पास भेजी गई। डीसीपी साउथ मामले की जांच मानसरोवर एसएचओ को निर्देश दिए। एसएचओ हेमेन्द्र कुमार ने मामले को नजरअंदाज कर जांच के एएसआई मदरूप को निर्देश दे दिए। ऐसे में पिछले एक माह से फाइल जांच के अधिकारी के पास ही पड़ी हुई है।