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जेडीए को िमल सकता है पुनर्गठन का हक

6 वर्ष पहले
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मुख्यमंत्रीवसुंधरा राजे अगले बजट सत्र में जेडीए और अन्य निकायों को 10 हजार वर्गगज तक के भूखंडों के पुनर्गठन का अधिकार प्रदान कर सकती हैं। अभी 1500 वर्गगज तक के भूखंडों के पुनर्गठन का ही निकायों के पास अधिकार है। इससे बड़े भूखंडों के पुनर्गठन और विभाजन की फाइलें सरकार के पास अप्रूवल के लिए जाती हैं, लेकिन निकायों के पास पट्टे जारी करने के लिए आकार की सीमा 10 हजार वर्गगज तक दे रखी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर क्रेडाई और टोडार सहित बिल्डर संगठनों ने गुरुवार को यूडीएच एसीएस अशोक जैन से मुलाकात की। बिल्डरों ने अफोर्डेबल हाउसिंग के नियमों और बैटरमेंट लेवी के नियमों को भी सरल बनाने की मांग की।

पूरे शहर में प्रोजेक्ट के लिए एयरपोर्ट का नियम क्यों, कुछ जमीन चिह्नित हो

क्रेडाईऔर टोडार पदाधिकारियों ने कहा कि पूरे शहर में अभी कहीं भी टाउनशिप या प्रोजेक्ट के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी से परमिशन लेनी पड़ती है। एयरपोर्ट शहर के एक तरफ है। शहर के चारों तरफ के प्रोजेक्ट की अनुमति के लिए विकासकर्ताओं को कई माह दिल्ली के चक्कर काटने पड़ते हैं। सरकार को शहर के कुछ क्षेत्र को चिह्नित करना चाहिए, जिसके लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी की अनुमति जरूरी नहीं हो।

बैठक में जेडीसी शिखर अग्रवाल के सामने ही बिल्डरों ने कहा कि जेडीए ने टाउनशिप बसाने के बदले बिल्डरों से करोड़ों रुपए विकास शुल्क तो ले लिया, लेकिन अकेले जयपुर में ही 400 से ज्यादा टाउनशिप में जेडीए ने सड़क बिछाई कोई सुविधा विकसित की। ऐसी टाउनशिप में बिना विकास रहने वालों को समस्या होती है या कोई रहने ही नहीं रहा। बिल्डरों ने कहा कि भवनों में फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) की अनुमति से जुड़ी फाइल सरकार के पास जाने का नियम है। इसी तरह विखंडित एफएआर के मामले भी सरकार के पास जाते हैं। जब सरकार के स्तर पर जुर्माना लेकर एफएआर बढ़ाने की अनुमति का नियम है तो यह अधिकार भी निकायों को दिया जाए। एफएआर की परमिशन की फाइलें महीनों सरकार के पास रहने से प्रोजेक्ट लेट हो रहे हैं।