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रागों की रानी ने की देवी की स्तुति

7 वर्ष पहले
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अश्विनी भिड़े देशपांडे ने सुनाए राग रागेश्वरी और दुर्गा

सिटी रिपोर्टर जयपुर

शास्त्रीयगायिका अश्विनी भिड़े देशपांडे ने गुरुवार को रागों की रानी कही जाने वाली रागिनी रागेश्वरी और उसके बाद राग दुर्गा से मां भवानी की स्तुति के भाव जगाए। मौका था श्रुतिमंडल की स्थापना के इक्यावनवे वर्ष के कार्यक्रमों की शृंखला के तहत उनके गायन का। महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में अश्विनी की स्तुति को सुनने संगीत प्रेमी भी अच्छी संख्या में मौजूद थे।

रागेश्वरीसे की कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रमकी शुरुआत उन्होंने खमाज थाट की रागिनी रागेश्वरी से की। बड़े गुलाम अली खां इस रागिनी को उसके शृंगार भाव और मखमली तासीर की वजह से रागों को रानी कहा करते थे। अश्विनी ने इस राग में विलंबित तीन ताल की रचना आज की रैना और द्रुत एक ताल की रचना देवी दुर्गे भवानी से इस रागिनी के छिपे भावों को जीवंत किया। इस राग में उन्होंने कोमल निषाद के साथ षड़ज, गंधार, मध्यम और धैवत स्वरों का जिस भक्तिभाव से मिश्रण किया उससे परिसर मां भवानी की भक्ति के रंग में रंग गया।

फिरपेश किया राग दुर्गा

इसकेबाद उन्होंने बिलावल थाट का राग दुर्गा पेश किया। पूर्वांग प्रधान इस राग को दक्षिण भारतीय संगीत पद्धति में शुद्ध सावेरी कहा जाता है और इस राग की उत्पत्ति भी शुद्ध सावेरी से ही मानी जाती है। उन्होंने इस राग में मध्य लय की बंदिश माता कालिका के जरिए देवी मां को स्वरांजलि पेश की।