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आधे-अधूरे रिश्तों की दास्तान

7 वर्ष पहले
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फिल्मअभिनेत्री लिलेट दुबे और अभिनेता मोहन अगाशे द्वारा कई दशाब्दियों से खेला जा रहा मोहन राकेश का नाटक ‘आधे-अधूरे’ एक बार फिर जयपुर के मंच पर नाट्य प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बना। इससे पूर्व भी यह नाटक जयपुर में मार्च, 2012 में खेला गया था। जयपुर सिटीजन फोरम के बैनर पर राजीव अरोड़ा के संयोजन में शनिवार को रवींद्र मंच पर इसका शो हुआ तो नाट्य प्रेमियों का हुजूम उमड़ पड़ा और कई लोग जगह नहीं मिलने के कारण वापस लौट गए।

स्त्रीकी आकांक्षाओं के टूटने की कहानी

मोहनराकेश का ‘आधे-अधूरे’ हालांकि साठ के दशक में लिखा गया नाटक है, लेकिन यह अभी भी आधुनिक रंग आंदोलन की अग्रणी पंक्ति के नाटकों में अपना अहम स्थान रखता है। भारतीय मध्यवर्गीय परिवार में स्त्री की आकांक्षा और उन आकांक्षाओं के टूटने को रेखांकित करने वाला इसके जैसा कोई और नाटक नहीं है। फिल्म, टीवी और रंगमंच की बहुचर्चित कलाकार लिलेट दुबे के निर्देशन में हुआ ‘आधे-अधूरे’ का यह शो भी एक यादगार प्रस्तुति के रूप में रेखांकित किया जाएगा।

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