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धर्म का मार्ग होता है सुखकारी: आचार्य नंदी
जयपुर| घीवालोंका रास्ता के दिगंबर जैन मंदिर ठोलियान में चल रही संगीतमय महावीर कथा में आचार्य गुप्ती नंदी ने कहा कि जिस प्रकार तिनके से तिनका जोड़कर घोंसला बनता है, उसी प्रकार भव-भव की साधना से भगवान महावीर जैसा तीर्थंकर पद प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि तीर्थंकर धर्मोपदेश देकर धर्म की प्रभावना करते हैं। धर्म का मार्ग सुखकारी होता है। पुण्य का फल अरिहंत पद है। पुण्य के फल से ही जीव को तीर्थंकर प्रकृति का बंध होता है। तीर्थंकर की दिव्य ध्वनि गणधर की मौजूदगी में ही खिरती है। तीर्थंकर की वाणी ओंकार मयी होती है और उनके समवशरण में उपस्थित जीव अपनी भाषाओं के अनुसार समझ लेते हैं। आयोजक कुशल ठोलिया ने बताया कि बुधवार को महावीर विधान होगा।
बालाचार्यसिद्धसेन ने जयपुर से किया ससंघ मंगल विहार: दिगंबरजैन मुनि बालाचार्य सिद्धसेन महाराज ने मंगलवार को दुर्गापुरा के दिगंबर जैन मंदिर से ससंघ श्रवणबेलगोला बाहुबली, कर्नाटक की अहिंसा पदयात्रा के लिए जुलूस के साथ मंगल विहार किया। दुर्गापुरा सूर्यनगर, चित्रकूट-प्रतापनगर टोंक रोड पर बालाचार्य के दर्शनों को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। जयपुर से मंगल विदाई के इस अवसर पर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।
बालाचार्य बीटू बाईपास होकर सूर्यनगर तारों की कूट पहुंचे। यहां श्रद्धालुओं ने जयकारों के बीच पाद पक्षालन एवं मंगल आरती की। शांतिनाथ दिगंबर मंदिर में जयकारों के साथ मंगल प्रवेश किया, यहां मंदिर प्रबंध समिति की ओर से पाद पक्षालन मंगल आरती की गई। मंगल विहार के दौरान मंगलवार को करीब 81 स्थानों पर बालाचार्य के पाद पक्षालन मंगल आरती की गई।
अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन परिषद के प्रदेश मंत्री विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि बालाचार्य शाम को बीलवा पहुंचे। यहां वे रात्रि विश्राम करेंगे। बालाचार्य बुधवार को सुबह बीलवा से मंगल विहार कर शिवदासपुरा होकर बाडा पदमपुरा पहुंचेंगे। फिर बालाचार्य पदमपुरा से चाकसू, निवाई, टोंक, कोटा, इंदौर होकर श्रवणबेलगोला बाहुबली पहुंचेंगे।