फाॅर्मों का खर्च गैस एजेंिसयाें पर थोपा
जयपुर | ऑयलमार्केटिंग कंपनी ने सरकारी योजना पहल को लागू कराने के लिए आवेदन पत्र की व्यवस्था गैस एजेंसी संचालकों को अपने स्तर पर करने के निर्देश दिए हैं। योजना के लिए छह तरह के अावेदन पत्रों के फॉर्मेट जारी किए हैं। प्रत्येक गैस एजेंसी के पास औसतन 15 हजार उपभोक्ता हैं। ऐसे में एजेंसी संचालकों के सामने यह समस्या खड़ी हो गई है कि वह 60 से 90 हजार फाॅर्मों की व्यवस्था कैसे करेगी।
सीधे बैंक खाते में सब्सिडी की रकम जमा कराने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय एक जनवरी से पहल योजना लागू करने जा रहा है। योजना के लिए आईओसी और भारत पेट्रोलियम ने अपनी एजेंसियों पर आवेदन पत्र उपलब्ध कराए हैं। जिन एजेंसियों को आवेदन नहीं पहुंचाए जा सके, उन्हें अपने स्तर पर फाॅर्म छपवाने के निर्देश दिए हैं। जिसके बिल का भुगतान कंपनी करेगी। हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने गैस एजेंसियों को अपने स्तर पर ही फाॅर्मों का खर्च वहन करने के निर्देश दिए हैं। शहर में कंपनी की 11 एजेंसियों के करीब 1.70 लाख गैस कनेक्शन हैं। ऐसे में एजेंसी संचालकों को करीब 10 लाख आवेदन फाॅर्मों का खर्च उठाना होगा। कंपनी का कहना है कि प्रत्येक एजेंसी को प्रति उपभोक्ता करीब 8 रुपए का भुगतान किया जा रहा है। साथ ही व्यवस्थाओं के लिए अलग से बजट भी जारी किया गया है। विवाद के कारणों का पता लगा समाधान कराया जाएगा।
^एचपी अधिकारियों ने एजेंसी संचालकों को अपने स्तर पर फार्मों का खर्च उठाने के निर्देश दिए हैं। आईओसी और बीपी की तरह एचपी भी आवेदनों का खर्च उठाए। लाखों आवेदन पत्रों का खर्च गैस एजेंसियां कैसे उठा सकती हैं। यह सरकार की गाइडलाइन का उल्लंघन है। दीपकसिंह गहलोत, अध्यक्ष,राजस्थान एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन