पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • अमेरिका से पूछकर मंत्री तय करते थे मनमोहन िसंह

अमेरिका से पूछकर मंत्री तय करते थे मनमोहन िसंह

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
Q. क्यायह सही है कि अमेरिका भारत के अंदरूनी मामलों में इस क़दर दख़लंदाज़ी करता है कि कौनसा मंत्रालय किसे मिले और किसे नहीं?

यहबिल्कुल सही है। मेरे मामले में ऐसा ही हुआ था।

Q.यहक्या मामला था?

मनमोहनिसंह प्रधानमंत्री बने तो मुझे विदेश मंत्रालय मिलना तय था। श्री िसंह ने मुझे सूिचत भी कर िदया। लेकिन सोनिया जी ने मुझसे कहा था कि अमेरिकन लोग मुझे विदेश मंत्री बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं!

Q.तोआपने क्या कहा उनसे?

मैंनेसोनिया जी से कहा कि मुझे तो और कोई मंत्रालय चाहिए ही नहीं। मैंने उनसे यह भी कहा कि हम दबाव में क्यों रहे हैं?

Q.फिरआपको कौनसा मंत्रालय मिला?

मुझेविदेश मंत्रालय ही मिला। मैंने उनसे कह दिया था कि आप उनसे कह दीजिए, हमारी विदेश नीति बनती है दिल्ली में।

Q.क्याअमेरिका तय करता है कि विदेश मंत्री कौन हो?

मनमोहनसिंह को कमजोर देखा तो ऐसा किया!

Q.क्याआपको लगता है कि मोदी सरकार का विदेश मंत्री अमेरिका ने तय किया होगा?

मुझेनहीं लगता!

Q.अमेरिकायह सब करता कैसे है? माध्यम क्या रहता है?

सबबड़े देश करते हैं ऐसे! डायरेक्ट-इनडायरेक्ट तरीके होते हैं! दिल्ली में अमेरिका के 130 डिप्लोमेट हैं!

Q.अमेिरकाआपके िवरोध में क्यों?

क्योंिकमैं अमेिरका की मूर्खताओं का िवरोध करता था।