पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • निकली जब गधे की बारात रोई दुल्हन, हंसी ऑडियंस

निकली जब गधे की बारात रोई दुल्हन, हंसी ऑडियंस

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
कहतेहैं आदमी मुसीबत में गधे को भी बाप बना बैठता है और धन का लालच इंसान के बदलते व्यवहार को बखूबी दिखाता है। कुछ ऐसे कथनों को नाटक के जरिये दिखाया गया। मौका था मंगलवार को जेकेके के रंगायन सभागार में कॉमेडी प्ले \\\"गधे की बारात\\\' का मंचन। हरी भाई वड़गॉवकर के मराठी नाटक का अनुवाद गधे की बारात का रूपांतरण और निर्देशन राजेन्द्र पायल ने किया। हल्की-फुल्की कॉमेडी के साथ लोगों ने इस प्ले को काफी एंजॉय किया जिसमें बड़े, बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे इसके बावजूद प्ले में संवाद के दौरान मदर टैरेसा का नाम मजाकिया तरीके से लेने पर कुछ दर्शकों ने शो खत्म होने के बाद आपत्ति जताई।

कथासार : गांवमें राजा चुनावी दौर के दौरान ये घोषणा कर बैठता है कि जो इंसान महल से लेकर गांव तक पुल तैयार करेगा उसके साथ राजा की बेटी की शादी की जाएगी। ऐसे में ये घोषणा सुन कर कुम्हार का पालतू गधा आगे आता है और वो एक रात में पुल तैयार कर देता है। कुम्हार (कालू) इस लालच में होता है कि अगर उसके गधे की शादी राजकुमारी से हो जाए तो वो रातोरात अमीर आदमी बन सकता है। कालू और गंगी गधे को अपना बेटा बनाकर उसकी खूब आवभगत करने लगते हैं।

बाद में जब गधे की शादी राजकुमारी से होती है तब वो गधे से इंसान बन जाता है और लोगों को पता लगता है कि वो इंद्र के श्राप से गधा बना होता है। शादी करते ही उसे इस श्राप से मुक्ति मिल जाती है जिसके बाद वो कालू और गंगी को धक्के मारकर निकाल देता है।

मोरल: इसकहानी में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि वाकई इंसान अपने मतलब के लिए जरूरत पड़ने पर उसकी जरूरत से ज्यादा चापलूसी करता है। इंसान मुसीबत में गधे को भी बाप बना लेता है इस नाटक के जरिए लोगों को यही बताया गया।

theatre festival jairangam

नाटक \\\"गधे की बारात\\\' का मंचन करते कलाकार।