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नाटक के जरिये रस्म और रिवाज पर कटाक्ष

7 वर्ष पहले
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शादीके पीछे होने वाली रस्म रिवाजों की आड़ में कई बार किस तरह की कुरीतियां छिपी होती हैं? कुछ ऐसी ही कुरीतियों, परेशानियों को बढ़ाने वाले लोगों पर हंसी ठिठोली के माध्यम से कटाक्ष किए गए। जयरंगम थिएटर फेस्टिवल के दूसरे दिन रवीन्द्र मंच पर \\\'मान गए दूल्हे भाई\\\' का मंचन किया गया। जिसे फारूख शेर खान ने डायरेक्ट किया। नाटक में शादी के जरिये रिश्तों के उतार-चढ़ाव को और मध्यमवर्गीय परिवार की समस्या को उजागर किया गया।

कथासार : दूल्हाभाई एक पात्र है, जो अपनी साली की शादी में जाकर अपने सहायक बन्ने के साथ मिलकर लोगों के लिए समस्या उत्पन्न करता है। जहां मध्यमवर्गीय परिवार जोड़-तोड़ कर लड़की की शादी कर रहे, वहीं घर का पहला दामाद समय-समय पर परेशानी खड़ा करता है। बड़ी बेटी भी बहन की शादी में फरमाइशों को साथ लिए चलती हैं। ऐसे में कम बजट की शादी में सभी लोगों की उपेक्षा पर खरा उतरना कभी स्टेज पर गंभीरता को लाता है तो कभी हास्य उत्पन्न करता है। इस दौड़ती-भागती जिंदगी में इंसान ने अपनी जरूरत बनाकर उसका बोझ अपनी ही बेटी पर डालकर उसको अभिशाप बना दिया है। नाटक के माध्यम से समाज में लुप्त हो रहे संस्कार और संस्कृति के साथ एकता और भाईचारा का संदेश भी दिया गया