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कर्म ऐसा करें कि यमराज के सामने भी निर्भय होकर खड़े हो सकें : किरीट भाई
जयपुर| भक्तिके दो मुख्य दुश्मन हैं, वाद और स्वाद। वाद में इंसान फंसता चला जाता है और विवाद में भी। विद्याधर नगर स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले राष्ट्रीय संस्थान में नौ दिवसीय रामकथा प्रवचनों में आचार्य किरीट भाई ने मंगलवार को कहा कि तुलसीदासजी ने संत और असंत दोनों की स्तुति की, जो उनकी विनम्र शीलता का परिचायक है। ज्ञानी होने का सबसे पहला लक्षण विनम्र होना ही है। जन्म से कोई व्यक्ति महान नहीं होता, कर्म से होता है। इसलिए अपनी वाणी को नहीं कर्म को बोलने दो। क्योंकि वाणी से जो बोला है, वो इतिहास भूल जाएगा, लेकिन जो कर्म से बोलता है वह अमर हो जाता है। कर्म ऐसा करो कि यमराज के सामने भी निर्भय होकर खड़े हो सके। आयोजक श्यामलाल बांकेबिहारी अग्रवाल ने बताया कि कथा 16 दिसंबर तक प्रतिदिन दोपहर 2 से 6 बजे तक चलेगी।