पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • कांग्रेस राज में भाजपा नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस होंगे

कांग्रेस राज में भाजपा नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस होंगे

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जयपुर. कांग्रेस शासन में भाजपा नेताओं कार्यकर्ताओं पर दर्ज प्रकरणों को राज्य सरकार ने वापस लेने का निर्णय किया है। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के निर्देश पर 35 से ज्यादा प्रकरणों को वापस लेने के आदेश गृह विभाग जारी कर चुका है और पौने तीन सौ से ज्यादा प्रकरणों में केस वापस लेने की कार्रवाई चल रही है।
यह तमाम मुकदमे अदालत में विचाराधीन है। अधिकांश मामले पिछली कांग्रेस सरकार (वर्ष 2008 से 2013) के दौरान के हैं, इनमें खासकर सरकार के खिलाफ जनआंदोलन छेड़ने, रास्ता रोकने और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने से जुड़े हैं। सरकार का यह तर्क है कि यह सब राजनीतिक मामले हैं। हर सरकार अपने कार्यकर्ताओं के खिलाफ ऐसे मुकदमे वापस लेती है। पिछली बार भी सरकार ने ढाई सौ से ज्यादा प्रकरण वापस लिए थे। सीआरपीसी में सरकार को इसका अधिकार भी है।

कलेक्टर-एसपी की रिपोर्ट पर निर्णय

गृहविभाग ने खुलासा किया है कि यह वे मामले हैं जिनका कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। गंभीर प्रवृति व्यक्तिगत नहीं है। जन आंदोलनों से जुड़े हुए हैं। राज्य सरकार ने यह मुकदमे संबंधित जिला कलेक्टर्स, पुलिस अधीक्षकों और एडीपी की राय के आधार पर अदालतों से वापस लेने का निर्णय किया है। एडीपी से संबंधित ट्रायल कोर्ट में प्रकरण वापस लेने का आवेदन पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। फिर भी मुकदमे के भविष्य पर अंतिम निर्णय कोर्ट ही तय करेगी।

मुकदमा वापस ले सकती है सरकार

सीआरपीसी की धारा 321 के तहत राज्य सरकार किसी भी प्रकृति के मुकदमे वापस ले सकती है, जिसकी कोर्ट में ट्रायल चल रही है। सरकार ने जो 30-35 मामले वापस लिए हैं उनमें गंभीर प्रकृति का कोई मामला नहीं है। यह सब जनआंदोलन से संबंधित है। किसी एक व्यक्ति से संबंधित मामले नहीं है। -राजेंद्र सिंह चौधरी, स्पेशलसेक्रेटरी होम एवं संयुक्त विधि परामर्शी, राजस्थान सरकार।

गृह विभाग के अनुसार सरकार को अब तक तीन सौ ऐसे आवेदन मिले हैं जिनमें क्रिमिनल केसेज वापस लेने का अनुरोध किया गया है। इनमें अधिकांश प्रकरण भाजपा नेताओं से जुडे़ हुए हैं, लेकिन फिलहाल जो 35 केसेज बंद करने के आदेश जारी किए जा चुके हैं उनमें कोई बड़ा नाम नहीं है। जिन 275 प्रकरणों में सरकार विचार कर रही है उनमें नामचीन नेता या कार्यकर्ताओं के नाम हो सकते हैं।