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जयपुर जू में भी हैं सुरक्षा में कई खािमयां

7 वर्ष पहले
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400 वन्यजीव-जंतु और स्टाफ जरा-सा

>केयर टेकर: 5>फॉरेस्ट गार्ड : 5

>सीसीटीवी कैमरे : 8>एंट्रेस पर पीटी जेट कैमरे : 2

>सालभरमें घूमने आते हैं करीब 2 लाख विजिटर्स

> वन्यजीव-जंतुओं की संख्या अनुमानित 400

बचाव के ये उपकरण उपलब्ध

बाड़े में प्रेशर पाइप लगे हैं। जरूरत पड़ने पर बाड़े में पानी छोड़ा जाता है। तीन ट्रेंकुलाइजर गन हैं। जिनसे 60 मीटर तक निशाना लगाया जा सकता है। जल्द ही कोलैप्सेबल लैडर (सिमटने वाली सीढ़ी) मंगवाई जाएगी।

कॉर्डलैस की व्यवस्था नहीं

अधिकारी,केयर टेकर, फॉरेस्ट गार्ड के बीच लगातार संपर्क बनाए रखने के लिए कॉर्डलैस की व्यवस्था नहीं है। मोबाइल पर जल्दी संपर्क हो पाना, नेटवर्क की समस्या, फोन स्विच ऑफ अन्य कई प्रकार की समस्या आम हैं।

जू में लोगों की आम दिनों की तरह चहल-पहल थी। िदल्ली की घटना के बाद यहां सुरक्षा के लिहाज से बाघ के पिंजरे के बाहर जाल लगाया गया। -फोटो मनोजश्रेष्ठ

सूत्रों के मुताबिक करीब 30 साल पहले जयपुर चिड़ियाघर में एक बच्चा भालू के बाड़े में गिर चुका है। तब बाड़े में जाल या अन्य सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने की वजह से यह हादसा हुआ। बच्चा भालू को बाउंडरी के करीब जाकर देख रहा था, इतने में उसका पैर फिसल गया और वह बाड़े के अंदर गिर गया।

जू प्रशासन अपने लेवल पर नहीं कर सकता बदलाव

जयपुरजू की उपवन संरक्षक, वन्यजीव आकांक्षा चौधरी के मुतािबक सेंट्रल जू ऑफ अथॉरिटी के नॉर्म्स के अनुसार ही जानवरों की जगह, दूरी, लंबाई, चौड़ाई बैरियर डिस्टेंस तय किए जाऐ हंै। इसमें चिड़ियाघर के अधिकारी अपने लेवल पर बदलाव नहीं कर सकते। हर जानवर के पिंजरे पर पिक्टोरियल लगा रखा है, ताकि वे जानवर के साथ बदसलूकी करें। चिड़ियाघर प्रशासन ने इस घटना के बाद डॉक्यूमेंट्री बनाने का फैसला किया है। इसमें विजिटर्स को जानवरों के व्यवहार के प्रति अवेयर किया जाएगा।

रिटायर्ड डीएफओ ने ये सुझाव दिए

चिड़ियाघर में मांसाहारी जानवरों के बाड़े पर एक सुरक्षाकर्मी हमेशा तैनात रहना चाहिए। क्योंकि पैंथर 12 फुट तक ऊंची छलांग लगा सकता है। ऐसे में वह विजिटर्स को नुकसान पहुंचा सकता है। बाड़े की ऊंचाई कम से कम 18 फुट होनी चाहिए। आपात स्थिति से निबटने के लिए जगह-जगह पर सुरक्षाकर्मियों के नाम और नंबर लिखी प्लेट लगी होनी चाहिए।

शिवचरणगुप्ता, रिटायर्डडीएफओ

बाड़े की गहराई है कम