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दो रेजीडेंट डॉक्टरों को स्वाइन फ्लू होने का सच

6 वर्ष पहले
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एसएमएस अस्पताल को थ्री लेयर और एन-95 मास्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। एन-95 मास्क ही स्वाइन फ्लू वायरस को रोकने में कारगर है।

5000एन-95 मास्क

अबतक एसएमएस अस्पताल को दिए गए हैं।

500एन-95 मास्क

रोजानास्टाफ और डॉक्टरों के लिए चाहिए।

20,000मास्ककम से कम इस्तेमाल होने चाहिए थे, जो नहीं हुए। यही कारण है कि स्टाफ और डॉक्टर भी स्वाइन फ्लू की जद में गए।

यहांिसर्फ साधारण मास्क

कांवटिया,जयपुरिया, गणगौरी अस्पताल में डॉक्टर्स, रेजीडेंट और स्टाफ के लिए केवल साधारण मास्क उपलब्ध हैं।

सरकारसे छिपा रहे हकीकत

पिछले7 दिनों से स्वाइन फ्लू को लेकर चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र राठौड़ और टास्क फोर्स की लगातार बैठकें कर रहे हैं, पर हकीकत उनसे भी छिपाई गई। संदिग्ध मरीजों को देखने और जांच करने वाले के पास भी एन-95 मास्क नहीं हैं।

डॉ. जगदीश मोदी इमरजेंसीइंचार्ज

डॉ. केके मंगल, मेडिकलअफसर

डॉ. सी.एल. नवल, मेिडसनएचओडी

डॉ. मानप्रकाश शर्मा एसएमएसअधीक्षक

राजेंद्र िसंह राठौड़ चिकित्सामंत्री

चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र राठौड़ के एसएमएस में स्वाइन फ्लू की स्थिति का जायजा लेने के लिए किए गए दौरे के समय की तस्वीर। इसमें मंत्री, उनके साथ आए अफसरों, अस्पताल अधीक्षक और विभाग अध्यक्षों के अलावा लगभग सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों को सामान्य मास्क दिए गए, जो स्वाइन फ्लू वायरस को रोकने में सक्षम नहीं है। वहीं, इनसेट में स्वाइन फ्लू वार्ड में अटेंडेंट और स्टाफ सामान्य मास्क और मफलर बांधकर अपना बचाव कर रहे हैं।

चेहरे तय करते हैं, किसे िमलेगा कौनसा मास्क

डॉ. अजीत िसंह प्रवक्ताएसएमएस अस्पताल