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रोजगार की कमी से विद्यार्थियों का फार्मेसी से हो रहा मोहभंग

7 वर्ष पहले
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प्रदेशके फार्मेसी संस्थानों के आंकड़ों में तो इजाफा हो रहा है, लेकिन निरीक्षण के समय निर्धारित मानदंड पूरे नहीं होने के बावजूद मान्यता देने से खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। लैबों में उपकरणों केमिकल की कमी के चलते एक-एक छात्र ठीक तरह से प्रेक्टिकल नहीं कर पाने के कारण आत्मविश्वास का ग्राफ भी नीचे गिरता जा रहा है। योग्य शिक्षकों का अभाव, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलना एवं रोजगार के अभाव में छात्रों का फार्मेसी से मोह भंग हो रहा है। ये हालात राजस्थान समेत अन्य राज्यों के है। यह खुलासा फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया तथा इंडियन फार्मास्यूटिकल एसोसिएशन स्टूडेंट फोरम के सहयोग से मौजूदा हालात में फार्मेसी शिक्षा पर ऑनलाइन सर्वे हुआ है। सर्वे में 13 सवालों के जवाब में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है।

जयपुर के एसएमएस अस्पताल परिसर स्थित एकमात्र सरकारी फार्मेसी संस्थान का 40 साल में भी डिग्री पाठ्यक्रम में अपग्रेड नहीं होना सरकार की गंभीर लापरवाही है। मजे की बात तो यह है कि एकमात्र सरकारी संस्थान को अभी तक इसे मेडिकल शिक्षा के अधीन नहीं होने से सवालिया निशान लग गया है।

पीसीआई ने डिप्लोमा, डिग्री कोर्स संचालित करने वाले फार्मेसी संस्थानों को जन्तुओं के विच्छेदन पर रोक लगा दी है। फार्मेसी अधिनियम की धारा 10 की प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए कंप्यूटर या मॉडल के जरिए ही प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए है। पीसीआई ने यूजीसी के निर्देश के बाद 28 अगस्त को जारी गजट नोटिफिकेशन में जन्तु के डिसेक्शन पर प्रतिबंध लगा दिया है। छह वर्षीय डॉक्टर ऑफ फार्मेसी (फार्म-डी) में विच्छेदन को मान्यता नहीं दी है।

फार्मेसी में जन्तुओं के विच्छेदन पर रोक

पीसीआई रजिस्ट्रार कम सचिव अर्चना मुदगल ने सर्वे रिपोर्ट के बाद हैल्थ साइंस यूनिवर्सिटी जयपुर समेत फार्मेसी कोर्स परीक्षा संचालित करने वाली देश की यूनिवर्सिटी को गुणवत्ता शिक्षा, परीक्षा स्तर सुधारने एवं प्लेसमेंट एजेन्सी के जरिए रोजगार दिलाने के लिए पत्र लिखा है। निरीक्षकों को निरीक्षण के समय रजिस्टर, टीचिंग स्टाफ की फोटो समेत नाम योग्यता, नियुक्ति पत्र, योग्यता प्रमाण पत्रों की जांच सख्ती से करने के निर्देश दिए है।

इसलिएमोह भंग : ड्रगएंड कॉस्मेटिक एक्ट की पालना, फार्मा इंडस्ट्रीज की संख्या कम, कॉलेजों में गुणवत्ता शिक्षा का नहीं मिलना,