\"मन को नियंत्रित रखने वाला सदा सुखी\'
जयपुर|शहर मेंजगह-जगह चल रहे चातुर्मास प्रवचनों में सेठी कॉलोनी दिगंबर जैन मंदिर में आर्यिका सृष्टि भूषण ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति जीवन में सुख की कामना करता है, लेकिन अपने कर्मों पर ध्यान नहीं देता। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को कर्मानुसार सुख दुख फलों को भोगना पड़ता है। व्यक्ति जिन सुविधाओं को सुख मान बैठा है वास्तव में वे सुख नहीं अपितु कालांतर में दुख को देने वाली है। उधर कीर्तिनगर के दिगंबर जैन मंदिर में मुनि अमित सागर ने कहा कि सांसारिक, मानसिक एवं शारीरिक दुखों में संतप्त व्यक्ति को तीन ही वस्तुएं बचाती हैं। संतान, संतोष और सत्संगति। जिसका पुत्र उसकी आज्ञा का पालन करता हो, जिसका मन संतुष्ट रहता हो और जिसकी अच्छी संगति हो। क्योंकि जो मन को नियंत्रित रखता है वह सदा सुखी रहता है।