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टाउन प्लानिंग शाखा निरीक्षण कर जोन को सौंपेगी रिपोर्ट, फिर होगी कार्रवाई

6 वर्ष पहले
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एफआईआर मामले में जोन उपायुक्तों बैठक आज

राजस्थानटाउनशिप पॉलिसी 2010 के तहत ईडब्ल्यूएस-एलआईजी के फ्लैट बनाने के नाम पर योजनाएं मंजूर कराकर गरीबों से आशियाने नहीं बनाने वाले बिल्डरों पर कार्रवाई की रूपरेखा तय कर ली गई है। ऐसे बिल्डरों के खिलाफ जेडीए की टाउन प्लानिंग और संबंधित जोन शाखा मिलकर काम करेगी। टाउन प्लानिंग से जुड़े अफसर ऐसी योजनाओं का एक बार फिर साइट इंस्पेक्शन कर इसकी रिपोर्ट जोन उपायुक्तों को सौंपेंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर जोन उपायुक्त नोटिस देकर मूल प्रोजेक्ट रोकेंगे या जरूरत पड़ने पर एनफोर्समेंट शाखा के जरिए इन पर कार्रवाई करेंगे।

सोमवार को जेडीसी शिखर अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह बात तय की गई है। इससे पहले टाउन प्लानिंग शाखा की ओर से इस मामले में कार्रवाई की जिम्मेदारी जोन उपायुक्तों पर डाली गई थी, वहीं जोन उपायुक्त मामले को टाउन प्लानिंग शाखा पर डाल रहे थे।

बैठक के बाद मामले पर जब टाउन प्लानिंग शाखा के अफसरों से सवाल किए गए तो उन्होंने कहा कि वे एक-दो दिन में ही संबंधित प्रोजेक्ट की साइट का निरीक्षण शुरू कर देंगे और जैसे-जैसे साइट देखी जाएगी, उसी हिसाब से संबंधित जोन को रिपोर्ट भिजवा देंगे, ताकि जल्द कार्रवाई हो सके। जानकारी हो कि ऐसे करीब 18 प्रोजेक्ट हैं, जिन्होंने ईडब्ल्यूएस-एलआईजी के फ्लैट समय पर तैयार नहीं किए।

राजस्थान टाउनशिप पॉलिसी 2010 के तहत कमजोर और अल्प आय वर्ग के नाम पर प्रोजेक्ट पास कराने वाले कई बिल्डरों ने ईडब्ल्यूएस और एलआईजी प्रोजेक्ट को बनाने में लापरवाही ही नहीं बरती, बल्कि इन भूखंडों को बनाकर बेच दिया या नियमों के विपरीत इन्हें ही गिरवी रख खुद के कैंप पास करा लिए। कुछ मामलों में तो ये भूखंड कागजों में दिखाए गए, लेकिन मौके पर उपलब्ध ही नहीं है। ईडब्ल्यूएस-एलआईजी मामले की जांच के दौरान कमेटी ने जब जोन उपायुक्तों से मौके की स्थितियों का पता कराया, तो यह बात सामने आई है। इसके बाद जेडीसी ने ऐसे 5 विकासकर्ताओं के खिलाफ जोन उपायुक्तों को एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। मंगलवार को इस मामले में सचिव पवन अरोड़ा संबंधित जोन उपायुक्तों (9, 11, 12 बी) की बैठक लेंगे।