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वाणिज्यिक कर के 5 करोड़ से नीचे वाले पेंडिंग केस के लिए एमनेस्टी स्कीम

6 वर्ष पहले
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श्रेणी (1) ऐसेमामले जिनमें कर चोरी पकड़ी गई, जानबूझ कर गलत घोषणा पत्र भरा गया अथवा अघोषित माल से भरा वाहन जब्त किया।

शर्त-एमनेस्टीस्कीम में आवेदन करने के लिए ऐसे कारोबारियों को पूरा टैक्स जमा करवाना होगा। इसके अलावा कोर्ट में चल रहे मामले को भी वापस लेना होगा।

छूट-ब्याजमें 75 प्रतिशत तथा पेनल्टी में 80 प्रतिशत की छूट मिलेगी। जिस साल से उसके खाते में डिमांड खड़ी हुई है उसके आगे के सालों की ब्याज और पेनल्टी पूरी माफ होगी।

उदाहरण:करचोरी के मामले में किसी व्यापरी पर 1 लाख रुपए टैक्स लगता है तो वैट अधिनियम के मुताबिक इस पर दोगुना पेनल्टी यानी 2 लाख रुपए और 50 हजार रुपए टैक्स लगेगा। मान लीजिए कि यह मामला 2012 का है तो 2015 तक यह रकम 12 प्रतिशत ब्याज के हिसाब से 4 लाख 30 हजार रुपए हो जाती है। एमनेस्टी स्कीम में व्यापारी को ब्याज में 1.50 लाख रुपए, पेनल्टी में 40 हजार रुपए छूट मिलेगी। इसके अलावा 2012 से 2015 तक 80 हजार रुपए ब्याज की माफी भी मिलेगी यानी उसे 4लाख 30 हजार रुपए की जगह 1 लाख 60 हजार रुपए ही चुकाने होंगे।

श्रेणी(2) ऐसेमामले में जिनमें कारोबारी को सिर्फ ब्याज की राशि चुकानी है।

शर्त-बकायाब्याजका 15 % एडवांस जमा करवाना होगा। इसके अलावा कोर्ट में चल रहे मामले को भी वापस लेने का प्रूफ देना होगा।

छूट-शेष85%ब्याज माफ होगा। इसके अलावा जिस साल से डिमांड क्रिएट हुई है उसके आगे के सालों का सारा ब्याज माफ होगा।

श्रेणी(3)- ऐसेसाधारण मामले जिनमें फार्म गलत भरे जाने के चलते टैक्स और ब्याज की भरी भरकम राशि खड़ी हो गई।

शर्त-इनमामलों में कारोबारी को पूरा टैक्स और ब्याज की 20 प्रतिशत राशि जमा करवानी होगी। मामला कोर्ट में है तो इसे वापस लेने का प्रूफ भी विभाग को 31 मार्च से पहले जमा करवाना होगा।

छूट-पेनल्टीपूरी माफ होगी साथ ही ब्याज में 80 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इसके अलावा जिस साल से डिमांड क्रिएट हुई है उसके आगे के सालों का सारा ब्याज माफ होगा।

श्रेणी (1) ऐसेमामले जिनमें कर चोरी पकड़ी गई, जानबूझ कर गलत घोषणा पत्र भरा गया अथवा अघोषित माल से भरा वाहन जब्त किया।

शर्त-एमनेस्टीस्कीम में आवेदन करने के लिए ऐसे कारोबारियों को पूरा टैक्स जमा करवाना होगा। इसके अलावा कोर्ट में चल रहे मामले को भी वापस लेना होगा।

छूट-ब्याजमें 75 प्रतिशत तथा पेनल्टी में 80 प्रतिशत की छूट मिलेगी। जिस साल से उसके खाते में डिमांड खड़ी हुई है उसके आगे के सालों की ब्याज और पेनल्टी पूरी माफ होगी।

उदाहरण:करचोरी के मामले में किसी व्यापरी पर 1 लाख रुपए टैक्स लगता है तो वैट अधिनियम के मुताबिक इस पर दोगुना पेनल्टी यानी 2 लाख रुपए और 50 हजार रुपए टैक्स लगेगा। मान लीजिए कि यह मामला 2012 का है तो 2015 तक यह रकम 12 प्रतिशत ब्याज के हिसाब से 4 लाख 30 हजार रुपए हो जाती है। एमनेस्टी स्कीम में व्यापारी को ब्याज में 1.50 लाख रुपए, पेनल्टी में 40 हजार रुपए छूट मिलेगी। इसके अलावा 2012 से 2015 तक 80 हजार रुपए ब्याज की माफी भी मिलेगी यानी उसे 4लाख 30 हजार रुपए की जगह 1 लाख 60 हजार रुपए ही चुकाने होंगे।

श्रेणी(2) ऐसेमामले में जिनमें कारोबारी को सिर्फ ब्याज की राशि चुकानी है।

शर्त-बकायाब्याजका 15 % एडवांस जमा करवाना होगा। इसके अलावा कोर्ट में चल रहे मामले को भी वापस लेने का प्रूफ देना होगा।

छूट-शेष85%ब्याज माफ होगा। इसके अलावा जिस साल से डिमांड क्रिएट हुई है उसके आगे के सालों का सारा ब्याज माफ होगा।

श्रेणी(3)- ऐसेसाधारण मामले जिनमें फार्म गलत भरे जाने के चलते टैक्स और ब्याज की भरी भरकम राशि खड़ी हो गई।

शर्त-इनमामलों में कारोबारी को पूरा टैक्स और ब्याज की 20 प्रतिशत राशि जमा करवानी होगी। मामला कोर्ट में है तो इसे वापस लेने का प्रूफ भी विभाग को 31 मार्च से पहले जमा करवाना होगा।

छूट-पेनल्टीपूरी माफ होगी साथ ही ब्याज में 80 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इसके अलावा जिस साल से डिमांड क्रिएट हुई है उसके आगे के सालों का सारा ब्याज माफ होगा।

सिटी रिपोर्टर| जयपुर

वाणिज्यिककर विभाग ने 5 करोड़ रुपए से नीचे वाले पेंडिंग मामलों को निपटाने के लिए सोमवार को एमनेस्टी स्कीम जारी कर दी। स्कीम में 31 मार्च तक आवेदन किए जा सकेंगे। पहली बार एमनेस्टी स्कीम उन मामलों पर भी लागू होगी जिनके लिए कोई कोर्ट केस नहीं चल रहा। स्कीम दो श्रेणियों में लागू होगी। पहली श्रेणी कोर्ट केसेज की होगी इसमें 31 दिसंबर 2013 से पहले के मामले शामिल किए गए हैं। दूसरी श्रेणी में वो मामले हैं जिनके लिए कोई कोर्ट केस नहीं चल रहे। इनमें 31 मार्च 2011 से पहले के मामले शामिल हैं।

1105करोड़ रुपए की टैक्स डिमांड

वाणिज्यिककर आयुक्त वैभव गालरिया ने बताया कि विभाग इस स्कीम के जरिए 1105 करोड़ रुपए के पेंडिंग मामलों को निपटाना चाहता है। इसमें 561 करोड़ के मामले ऐसे हैं जिन पर कोर्ट स्टे है। वहीं 244 करोड़ रुपए के मामलों में कोर्ट रिकवरी के आदेश जारी कर चुका है और 300 करोड़ रुपए में वे मामले शामिल किए गए हैं जिसकी डिमांड गलत घोषणा पत्र भरने के चलते खड़ी हुई।