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ईडब्ल्यूएस के फ्लैट नहीं बनाने पर कार्रवाई होगी
तत्कालीन जोन उपायुक्त और एटीपी भी भूमिका भी सवाल
राजस्थानटाउनशिप पॉलिसी-2010 (10 हेक्टेयर से अधिक) और पॉलिसी फॉर रेजिडेंशियल ग्रुप हाउसिंग एंड अदर स्कीम इन प्राइवेट सेक्टर में ईडब्ल्यूएस-एलआईजी के तहत शर्तों के मुताबिक निर्माण नहीं करने वालों पर कार्रवाई होगी।
इस बारे में जेडीसी शिखर अग्रवाल ने सदस्य सचिव बीपीसी को आदेश दिए हैं कि वे नियमों के अंतर्गत काम नहीं करने वाले विकासकर्ताओं के मूल प्रोजेक्ट का कार्य रुकवाने के लिए मुख्य नियंत्रक प्रवर्तन को लिखकर पालना रिपोर्ट लें। साथ ही ईडब्ल्यूएस-एलआईजी फ्लैट निर्माण में देरी पर पैनल्टी का मांग पत्र तैयार कर सौंपे। इस मामले में जेडीए सचिव पवन अरोड़ा की ओर से हुई जांच मुताबिक 30 प्रोजेक्ट में से 18 में शर्तों मुताबिक काम नहीं होने की बात सामने आई थी। गरीबों के फ्लैट निर्माण में हुई लापरवाही का मामला भास्कर ने उजागर किया था। गड़बड़ियों के बावजूद टाउन प्लानिंग शाखा की ओर से इस मामले में कार्रवाई जोन स्तर पर डाल दी गई।
ईडब्ल्यूएस-एलआईजी मामले में हुई गफलत को लेकर संबंधित जोन उपायुक्तों और संबंधित जोन के सहायक नगर नियोजक (एटीपी) की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। क्योंकि संबंधित रिकॉर्ड और मंजूरी के मामले इन्हीं के स्तर पर निपटाए जाते हैं। जब कैंप लगता है तो डिमार्केशन के बाद ही नक्शा जारी होता है, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ये नक्शे कैसे जारी हो गए। वहीं जेडीए की ओर से बार-बार निर्देशों के बावजूद इन्होंने इस ओर कोई कार्रवाई भी नहीं की थी। इसके चलते जेडीए ऐसे गिरवी प्लॉटों को ईडब्ल्यूएस-एलआईजी के जरूरतमंदों को आवंटित नहीं कर सका।