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गुरुग्रंथ साहब ही एकमात्र गुरु : प्रो. दर्शनसिंह

7 वर्ष पहले
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गुरुनानकपुराकेगुरु गोविंदसिंह पार्क में रविवार को दो दिवसीय विशेष गुरुबाणी कीर्तन गुरु ग्रंथ साहिब पर व्याख्यान संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संगत ने शिरकत की और मत्था टेक अरदास मांगी।

कीर्तन में गुरु ग्रंथ साहब अकादमी, कनाडा के संस्थापक प्रोफेसर दर्शनसिंह खालसा ने डरिए तां जे, किछु आप तू कीजै, सभु करता अपनी कला बधाए शबद गान कर संगत को निहाल किया। उन्होंने सिखों से आह्वान किया, कि कुछ लोग दशम ग्रंथ को श्रीगुरु दशम ग्रंथ साहब कहकर भ्रम फैला रहे हैं, जबकि सिख कौम की दसवीं पातशाही गुरु गोबिंद सिंह ने अपने देहावसान से पूर्व श्री गुरु ग्रंथ साहब को गुरु की पदवी प्रदान की थी और सिखों को गुरुग्रंथ साहब को गुरु मानने का आह्वान किया था। उनके बाद कुछ शरारती लोगों ने गुरु गोबिंदसिंह जी की कुछ रचनाओं के साथ अपनी रचनाएं जोड़कर एक किताब का गठन किया, जिसे दशम ग्रंथ का नाम देकर भ्रम फैला रहे हैं। इस बारे में उन्होंने दशम ग्रंथ के भ्रम में ना पड़कर गुरु ग्रंथ साहब को ही गुरु मानने का आह्वान किया।

इस मौके पर भाई मनजीत सिंह ने भी कीर्तन किया। संयोजक महेंद्र सिंह गुलेर ने बताया कि प्रो. दर्शन सिंह अकाल तख्त साहब के जत्थेदार रह चुके हैं।