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नुकसान नहीं हो, इसलिए बरामदों में लगेंगे स्टील पिलर

6 वर्ष पहले
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जयपुरमेट्रो की ओर से छोटी चौपड़ पर काम के दौरान अब सभी बरामदों को सुरक्षित रखने की रणनीति बदली गई है।

भविष्य में किसी भी कारण से बरामदों के पिलर या छत धंसने या दरार पड़ने जैसी नौबत नहीं आए, इसके लिए कई फैसले किए गए हैं। जयपुर मेट्रो की एक हाई पावर कमेटी ने इन फैसलों से पहले रविवार को छोटी चौपड़ पर मौका निरीक्षण भी किया। इस निरीक्षण से पहले ही बरामदे की धंसी छत को हटा दिया गया था। इस छत का अब जयपुर मेट्रो की ओर से ही पुनर्निर्माण किया जाएगा।

^हमने सभी स्थितियों का आकलन कर बदलाव किए हैं। लोगों को थोड़ी असुविधा हो सकती है, लेकिन बरामदों और लोगों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता रहेगी। -निहालचंद गोयल, सीएमडी, जेएमआरसी

जयपुर मेट्रो ने बरामदे के धंसने की घटना से सबक लेकर लोगों और बरामदों की सुरक्षा के लिए बदलाव किए हैं। अब तक जहां-जहां डी-वॉल बनाने का काम चल रहा था, वहीं बरामदों की छतों की प्रॉपिंग यानी स्टील पिलर से आधार बनाया जा रहा है। अब उन सभी 100 दुकानों के सामने के बरामदों में ऐसा किया जाएगा, जिनके सामने मेट्रो का काम चल रहा है। इसके अलावा खुदाई से पता चला कि बरामदों के नीचे के हिस्से में ड्रेनेज लाइन आने से मिट्टी गीली हो गई है। बाहरी हिस्से में जरा भी जमीन खोदने से वह गीली मिट्टी धंसकर बाहर जाती है। ऐसी स्थिति में अब पाइपलाइन को जमीन के अंदर के बजाय ऊपरी हिस्से में ही डालने का फैसला किया गया है।

}हाईपावर कमेटी ने छोटी चौपड़ का दौरा किया

} पाइपलाइन जमीन के अंदर नहीं, बाहर लगाएंगे