भूमि के उपयोग के हिसाब से हो लीज वसूली
लीजवसूली के लिए दो ही श्रेणी और नियमों में भिन्नता से भूमि मालिकों को अनावश्यक रूप से अधिक लीज राशि का भुगतान करना पड़ रहा है। यह देखते हुए लैंड यूज के हिसाब से लीज वसूली की और श्रेणियां बनाने तथा जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) और जयपुर नगर निगम में लीज में छूट नियम समान करने की मांग की जा रही है। वहीं जेडीए पहले पांच वर्ष तक लीज में 50 फीसदी छूट देता है, जबकि नगर निगम नीलामी में तीन वर्ष के लिए ही छूट मिलती है। ऐसे में जेडीए की ओर से जयपुर नगर निगम को हस्तांतरित कॉलोनियों में रहने वालों के लिए परेशानी पैदा हो गई है।
प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन
^जेडीएने निर्धारित ऊंचाई तक की बहुमंजिला इमारतों के लिए वन टाइम लीज वसूली का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज रखा है, ताकि बाद में लीज वसूली को लेकर कोई समस्या नहीं रहे। शिखरअग्रवाल, जेडीसी
^वैसेदोनों एजेंसियों के कानून अलग-अलग है। इनके तहत ही लीज वसूली के नियम बनाए हुए हैं। राज्य सरकार को इस संबंध में कोई ज्ञापन मिलता है, तो उस पर विचार जरूर किया जाएगा। -अशोकजैन, अतिरिक्तमुख्य सचिव, यूडीएच
नियमों में भिन्नता से परेशानी
^लीजमें छूट के नियमों में भिन्नता से पेचीदगियां हो गई है। जेडीए ने जिन आवासीय योजनाओं को नगर निगम को हस्तांतरित कर दिया है, उनमें भूखंडों की लीज मनी में अंतर गया है। इसको देखते हुए एक समान लीज नियम होने चाहिए। लीज नियमों में भिन्नता से मकान मालिकों पर आर्थिक भार बढ़ा है। -गोपालगुप्ता, चेयरमैन,क्रेडाई राजस्थान
फ्लैटखरीदारों से हो लीज वसूली
^बहुमंजिलाइमारतों में सभी फ्लैट बिकने के बाद बिल्डरों से लीज वसूली नहीं की जानी चाहिए। यह तार्किक रूप से गलत है। फ्लैट खरीदारों से ही लीज की वसूली की जानी चाहिए। ओमप्रकाश मोदी, चेयरमैन,ओकेप्लस ग्रुप
बिल्डरों का यह है तर्क
लीजनियम तार्किक नहीं होने से बिल्डरों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ताल है। बिल्डरों का तर्क है कि बहुमंजिला इमारतों में सारे फ्लैट बिकने बाद उस इमारत को हस्तांतरित कर दिया जाता है। ऐसे में आने वाले वर्षों की लीज जमा कराने की जिम्मेदारी फ्लैट मालिकों की होनी चाहिए, लेकिन लीज का डिमांड नोटिस बिल्डरों के नाम से निकालता रहता है। इससे परेशानी होती है।
लीजके लिए पांच श्रेणियों का सुझाव
अभीप्रदेश में लीज वसूली के लिए दो ही श्रेणियां