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सरकार को किसानों से ज्यादा कर्मचारियों की चिंता

7 वर्ष पहले
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बोनस देने पर लगी रोक हटे तो बात बने

सरकारने एक साल में कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में तो 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी, लेकिन किसानों की फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य में इस अवधि में औसत 0 से 4 प्रतिशत ही बढ़ाया है। केंद्र सरकार के आदेश पर अभी तक राज्य सरकार की ओर से किसानों को जो समर्थन मूल्य पर फसल खरीदने के दौरान किसानों को बोनस राशि दी जाती थी, वो भी जून 2014 के आदेश के बाद से बंद है।

किसान महापंचायत के रामपाल जाट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सरकारी कर्मचारियों की भांति फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 17 प्रतिशत बढ़ोतरी किए जाने एवं बोनस की समाप्ति के परिपत्र को वापस लिए जाने के लिए ज्ञापन सौंपा। हाल ही में राज्य सरकार ने कर्मचारियों के लिए सात प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की घोषणा की है। इससे पहले जनवरी 2014 में कर्मचारियों को 10 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया गया था, इस प्रकार एक वर्ष में महंगाई भत्ता 17 प्रतिशत बढ़ाया गया। किसान महापंचायत की मांग है कि इसी तर्ज पर किसानों के लिए भी 18 कृषि उपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों में 17 प्रतिशत बढ़ोतरी की जाए। दूसरे राज्यों की बात करें तो गुजरात में इस वर्ष बाजरे का प्रति. क्विंटल समर्थन मूल्य 1600 रुपए, ज्वार के 1800 रु., मूंग के 5000 रुपए। छत्तीसगढ़ में मूंग का समर्थन मूल्य छह हजार रुपए है जबकि पंजाब में 6100 रुपए है।

इस वर्ष खरीफ की फसलों के लिए जून में न्यूनतम समर्थन मूल्यों की घोषणा की गई थी, जिसमें पिछले वर्षों की तुलना में मूंगफली, सोयाबीन काली, सोयाबीन पीपी एवं मक्का पर मूल्य वृदि्ध शून्य प्रतिशत है। इसी प्रकार अन्य उत्पादों में भी मूल्य वृद्धि 17 प्रतिशत से कम है, जो निम्न सारणी में दर्शित है।

केंद्र सरकार के खाद्य, उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने 12 जून 2014 को परिपत्र जारी कर राज्यों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बोनस दिए जाने पर रोक लगा दी। किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट ने मोदी को भेजे पत्र में कहा कि किसानों को केंद्र सरकार की ओर से बोनस दिए जाने का विकल्प उपलब्ध है। पहले वर्ष 2010- 11 में मूंग तथा उड़द पर केंद्र सरकार की ओर से प्रति क्विंटल 500 रुपए बोनस दिया गया था। इसी प्रकार अन्य कृषि उत्पादों पर भी बोनस दिया जाता रहा है।