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क्या आपको पता है 7 साल तक सजा वाले अपराधों में पुिलस बिना नोटिस गिरफ्तार नहीं कर सकती

7 वर्ष पहले
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सीआरपीसीके तहत सात साल तक सजा वाले अपराधों में गिरफ्तारी के लिए कानून में संशोधन चार साल बाद भी पूरी तरह से लागू नहीं हो सके। वर्ष 2010 में सीआरपीसी की धारा 41 में संशोधन कर जोड़ी गई धारा 41 के बारे में थानों में तैनात पुलिस अफसर भी अनभिज्ञ हैं। इस बारे में पुलिस मुख्यालय द्वारा पुलिस थानों को अब निर्देशित किया जा रहा है। ऐसे मामलों में पुलिस पहले आरोपी को नोटिस देकर बुलाएगी और नोटिस की शर्तों का पालन किए जाने की स्थिति में आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। साथ ही आरोपी को गिरफ्तार कर रिमांड पर पर लेने से पहले जांच अधिकारी द्वारा अदालत को लिखित में कारण बताने होंगे। हाल ही सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में इन प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले पुलिस अफसरों पर हाइकोर्ट में अवमानना की कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए गए हंै। पुलिस सिर्फ दहेज प्रताड़ना के मामलों में ही नोटिस देने की औपचारिकता पूरी कर रही है।

^2010 के कानून को अब लागू करने की पहल स्वागत योग्य है। सिविल मामलों में अनुसंधान की शक्ति का पद दुरुपयोग कर किसी निर्दोष की गिरफ्तारी कर लेने से बड़ा कोई जुल्म नहीं है। नया प्रावधान झूठी एफआईआर की आड़ में गिरफ्तार करवा कर मामला सैटल करवाने, ब्लैक मेलिंग करने की घटनाओं पर रोक लगाएगी। इसका पालन डीजीपी कठोरता से करवाएं। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। हेमंतनाहटा, धारा41 को लागू करवाने में प्रयासरत अधिवक्ता

सात साल या उससे कम सजा वाले अपराध

धोखाधड़ी,हत्या का प्रयास, मारपीट, दहेज प्रताड़ना, राजकार्य में बाधा, छेड़छाड़, चोरी, जान से मारने की धमकी देना, फिरौती मांगना के अपराध में सात साल या इससे कम की सजा का प्रावधान है। और भी मामले हैं, लेकिन ज्यादातर दर्ज होने वाले मामले ये ही होते हैं।

यह होगा फायदा

गैर-जरूरीगिरफ्तारी की घटनाओं पर रोक लगेगी।

गिरफ्तारी का भय दिखाकर मामलों को िनपटाने की घटनाओं पर रोक लगेगी।

औरयह नुकसान

अनुसंधानमें ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। इसमें कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

मारपीट और सख्ती नहीं कर पाने के कारण पुिलस को मामले को वैज्ञािनक दृिष्ट से सुलझाना होगा।

गिरफ्तारी की स्थिति में

फर्दगिरफ्तारी में आरोपी के किसी परिचित या गणमान्य नागरिक के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। धारा 41 (घ) में संशोधन के तहत आरोपी को पूछताछ के