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दूतावास की वेबसाइट की लें मदद

7 वर्ष पहले
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चीन के गैर मान्यता वाले मेडिकल संस्थानों में एडमिशन दिला रहे कंसल्टेंट

चीनसे एमबीबीएस की डिग्री दिलाने के नाम पर कुछ कंसल्टेंट छात्रों से मोटी रकम लेकर ऐसे में मेडिकल संस्थानों में प्रवेश िदलाने का झांसा दे रहे हैं, जिनका नाम चीन के शिक्षा मंत्रालय और भारतीय दूतावास की ओर से जारी सूची में नहीं है। इसके बावजूद शहर में इन संस्थानों के लिए काम कर रहे कंसल्टेंट छात्रों को गुमराह कर भेज रहे हैं। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की ओर से सूची जारी नहीं होने से कंसल्टेंट इसका फायदा उठा रहे हैं। ऐसे में अब पांच साल बाद लाखों रुपए खर्च कर ली जाने वाली एमबीबीएस की डिग्री के औचित्य पर सवाल उठ रहे हैं।

अर्हताप्रमाण-पत्र हटाने से बढ़ी दिक्कत

किसीभी छात्र को चीन में मेडिकल डिग्री के लिए जाने से पहले मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) से अर्हता प्रमाण-पत्र लेना पड़ता था। दक्षिणी राज्यों के छात्रों की मांग अन्य राज्यों के छात्रों के दिल्ली के चक्कर से बचने के लिए इसे ऑनलाइन किया गया। बाद में इसे समाप्त ही कर दिया। ऐसे में अब छात्रों को चीन रूस सहित अन्य देशों की मान्यता प्राप्त संस्थानों की जानकारी नहीं मिल पाती है।

रखें ध्यान

^यूनिवर्सिटी की कोई भी फीस कंसल्टेंट को नहीं दे।

^ कंसल्टेंट को प्रोसेसिंग फीस देने से पहले उसकी ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को लिखित में ले।

^संबंधित यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई करके आने वाले पूर्व छात्रों से फीडबैक जरूरी ले।

शिक्षा विभाग एमसीआई के नियमों के अभाव में कई लोग बिना रजिस्ट्रेशन के ही कंसल्टेंसी का काम कर रहे हैं। मेडिकल से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च शिक्षा विभाग इन कंसल्टेंट का रजिस्ट्रेशन करे तथा उनसे तय राशि की एफडी अमानत राशि भी ले ताकि छात्रों के साथ धोखाधड़ी नहीं हो।

नियम के अभाव में बिना रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं कंसल्टेंसी

केस -1

हरमाड़ाके गोपाल कृष्ण शर्मा को एक कंसल्टेंट ने चीन की अधिकांश मेडिकल कॉलेज में सीट भर जाने की बात कह कर ताइसान यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस डिग्री करवाने का िदलासा देकर 50 हजार रुपए ले लिए। जबकि इस यूनिवर्सिटी का नाम भारतीय दूतावास की ओर से जारी सूची मंे नहीं है। मान्यता नहीं होने के अंदेशे के बाद छात्र को रूस के कॉलेज में एडमिशन लेना पड़ा।

केस-2

झोटवाड़ाके रबिंद्र कुमार