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सरकारी स्कूल मर्ज होने से बच्चे हो रहे परेशान
जिलेमें सरकारी स्कूलों के एकीकरण के बाद छोटी कक्षाओं के बच्चों को परेशानियां झेलनी पड़ रही है। कई गांवों में स्कूल दूर पड़ने पर ग्रामीणों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों को तालाब, एनिकट नाड़ी पार करना पड़ रहा है। कई जगह हाईवे रेलवे लाइन होने से ग्रामीण खुद बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रहे हैं। ऐसी स्कूल भी हैं जो एकीकरण की प्रक्रिया में बंद हो गए परंतु बच्चे उन्हीं स्कूलों में पढ़ने जा रहे हैं। ग्रामीणों ने भी तय कर लिया है कि बच्चे को पुरानी स्कूल में ही पढ़ाएंगे। कुछ जगह गांव की बेटियां ही बच्चों को पढ़ा रही है। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल नहीं खोलने तक उन्हें गांव में खुद ही पढ़ाएंगे। जिले में 871 स्कूलों को 658 स्कूलों में मर्ज किया गया है। आदर्श स्कूलों में पर्याप्त कमरें नहीं होने से कहीं बच्चे तो चबूतरे तो कहीं सड़क पर बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। एकीकरण के बाद जिले में क्या हालात है यह सच जानने के लिए भास्कर रिपोर्टर्स ने मौके पर जाकर देखे हालात।
शाहपुरा
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70 प्रतिशत स्कूल पुराने भवन में ही
एकीकरणकी प्रक्रिया में जो स्कूल मर्ज हुए है उनमें से करीब 70 प्रतिशत स्कूल पुराने भवन में ही चल रहे हैं। डीईओ की ओर से करवाएं गए भौतिक सत्यापन में यह जानकारी सामने आई है। जो स्कूल आदर्श बने हैं, वहां बच्चों को बिठाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने से पुराने भवनों में ही स्कूल चल रहे हैं। जो स्कूल आदर्श स्कूलों में शिफ्ट हुए हैं, वहां नहीं भेजने के लिए ही विरोध हो रहा है।
बीईईओ भी नहीं चाहते स्कूल मर्ज हो
एकीकरणके बाद 113 स्कूलों को मर्ज नहीं करने के लिए आवेदन आए हैं। इनमें ग्रामीणों ने तर्क दिए हैं कि तालाब नाडी पड़ने से बच्चों को परेशानी हो रही है। इन परिवेदनाओं पर डीईओ ने सभी बीईईओ से भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट मंगवाई। इसमें मांडल बीईईओ ने ही अधिकांश स्कूलों को मर्ज करना उचित बताया। बाकी बीईईओ ने रिपोर्ट में लिखा है कि ग्रामीणों के विरोध बच्चों की परेशानी को देखते हुए इन स्कूलों को मर्ज करना उचित नहीं है।
तालाब की पाल से होकर बच्चे जाते हैं स्कूल
राप्रावि चमारों का झोपड़ा को राउप्रावि बिरमियास में मर्ज कर दिया। इस स्कूल के 34 बच्चों को ग्रामीणों ने स्कूल भेजना बंद कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते में तालाब नाला पड़ता