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फल-सब्जी मंडी अफसरों कर्मियों को मिला वेतन

7 वर्ष पहले
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फल-सब्जी मंडी अफसरों कर्मियों को मिला वेतन

जयपुर| शहरकी सबसे बड़ी मुहाना फल-सब्जी मंडी के अफसरों कर्मचारियों को 15 दिन की देरी के बाद इस महीने का वेतन मिल गया। मंडी को बजट आवंटित नहीं होने के कारण इस महीने में वेतन नहीं मिल पा रहा था। मंडी में 80 अफसर कर्मचारी काम करते है। मुहाना फल-सब्जी मंडी में हर महीने वेतन भत्तों पर 25 लाख रुपए खर्च होते है। कृषि विपणन बोर्ड के निदेशक दिनेश यादव मंडी सचिव देवीलाल के दखल के बाद ही वेतन जारी हो सका है। सरकार ने पिछले साल फल-सब्जी मंडी में अगस्त 2013 में मंडी शुल्क 1.6 से घटाकर 0.1 फीसदी कर दिया था। इससे मंडी समिति की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है।

अफसरों कर्मचारियों के वेतन देने के लिए समिति को कृषि विपणन बोर्ड के बजट की मंजूरी का इंतजार करना पड़ा। मुहाना फल-सब्जी मंडी में हर महीने करीब 50 लाख रुपए खर्च होता है। इसमें से 25 लाख रुपए प्रोजेक्ट लोन की किश्त और 25 लाख रुपए अफसर कर्मचारियों के वेतन भत्तों में खर्च होते है। पहले मंडी शुल्क 1.6 फीसदी होने से मंडी समिति को करीब 25 करोड़ रुपए की सालाना आय हो जाती है। अब अगस्त 2013 से केवल नाममात्र 0.1 फीसदी यानि प्रति सैकड़ा केवल एक पैसा लिया जा रहा है। ऐसे में हर महीने केवल चार लाख रुपए की आय होती है। इससे मंडी का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।

अन्य फल-सब्जी मंडियों में भी नहीं मिला वेतन :

प्रदेश के जोधपुर, उदयपुर, अजमेर, कोटा, गंगनगर सहित अन्य जिलों की मुख्य मंडी उनके सब यार्ड में लगे अफसरों कर्मचारियों को भी वेतन के लिए परेशान होना पड़ रहा है। इनमें से अधिकांश मंडियों में आधा महीना होने के बावजूद पिछले महीने का वेतन नहीं मिला है।