भू-अधिग्रहण विधेयक किसान विरोधी : चौधरी
जयपुर। आरएसएसके आनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ ने राज्य सरकार के केबिनेट में मंजूर किए प्रस्तावित नए भू-अधिग्रहण विधेयक - 2014 को लेकर किसान विरोधी होने की आशंका जताई है। भारतीय किसान संघ ने कहा कि जो खबरें रही है उसके मुताबिक राज्य सरकार कूटनीतिक चाल चल रही है ताकि इस बिल पर राष्ट्रपति से हस्ताक्षर कराए जा सके और लोगों के आक्रोश से भी बचा जा सके।
भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री बद्रीनारायण चौधरी ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि सन 1894 के कानून में अंग्रेज भी लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने पर किसानों को जेल भेजने का प्रावधान नहीं कर पाए थे। परंतु राज्य सरकार के प्रस्तावित कानून में तीन लाख रुपए तक के अर्थ दण्ड और माह तक की सजा के भी प्रावधान किए गए है। यदि ऐसा ही होता है तो पहले से ही पीड़ित इस वर्ग को अपमानित करने जैसा ही होगा। चौधरी ने कहा कि कोई भी लोकतांत्रिक और कल्याणकारी सरकार अपने नागरिकों के लिए ऐसा दमनकारी कानून नहीं बना सकती। उन्होंने कहा कि नए भू-अधिग्रहण कानून में किसानों को 2 से 5 गुणा तक मुआवजे देने की घोषणा का स्वागत करेंगे यदि राज्य सरकार केंद्रीय कानून में मुआवजे दी गई अन्य राहत में कटौती नहीं करती। सरकार परिवर्तन के पश्चात किसानों को भी नई सरकार से काफी अपेक्षाएं है।
चौधरी ने कहा कि प्रदेश की सरकार संभवतया चतुराई पूर्वक कुछ मुआवजा राशि बढ़ाकर उसी के प्रचार की आड़ में किसानों के कई अधिकारों में भारी कटौती कर रही है। इसको लेकर किसान, मजदूर एवं आदिवासियों में भय है। केंद्र के कानून में संपूर्ण पुनर्वास की जिम्मेदारी सरकार या संबंधित कंपनी की हैं। परंतु राज्य का प्रस्तावित कानून 10 या 30 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा दे कर अपनी जिम्मेदारी से पीछा छुड़ाने जैसा है।