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फूल बंगला में विराजे गणेशजी

7 वर्ष पहले
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जयपुर| बुधपुष्य पर प्रथम पूज्य भगवान गणपति की विशेष पूजा आराधना हुई। गढग़णेश मोतीडूंगरी गणेश समेत सभी मंदिरों में धार्मिक आयोजन हुए। गणपति के भक्तों ने अष्टोत्तरशत नामावली पाठ कर लंबोदर से सुख-समृद्धि की कामना की।

बुधवार के दिन पुष्य नक्षत्र होने के कारण श्रद्धालुओं का सुबह से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया, जो शयन झांकी तक अनवरत चलता रहा। पुष्य नक्षत्र शुरू होने के बाद भगवान गणेश का पंचामृत से अभिषेक हुआ और मोदक का भोग लगाया गया। नाहरगढ़ की पहाड़ी पर स्थित गढग़णेश मंदिर, जेएलएन मार्ग के मोतीडूंगरी गणेश मंदिर, ब्रह्मपुरी के नहर के गणेश, लाल डूंगरी के गणेश जी, सूरजपोल बाजार के श्वेत सिद्दी विनायक, ध्वजाधीश तथा चांदपोल गेट के बाहर स्थित भगवान गणपति के मंदिरों में मेला लगा। मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में सुबह 251 किलो दूध, 21 किलो दही, सवा पांच किलो बूरा, शहद, केवड़ा जल, गुलाबजल, केवड़ा इत्र और गुलाब जल से भगवान गणेश का अभिषेक किया गया। इसके बाद भगवान गणपति को 1001 मोदक अर्पित किए गए। शाम को भगवान गणेश के फूल बंगला झांकी के दर्शन हुए। उधर, सूरजपोल बाजार के सिद्धि विनायक मंदिर में पुष्य नक्षत्र में भक्तों ने दुग्धाभिषेक दूर्वा के अंकुर से पूजा-अर्चना की गई और शरद ऋत का विशेष पौषबड़ा भोग लगा। प्रन्यासी मोहनलाल शर्मा ने बताया कि विशेष पूजा-अर्चना हुई। पौषबड़ा महोत्सव में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसादी ग्रहण की।

गणगौरी गेट के अंदर मनोकामनेश्वर गणेश मंदिर में पुष्य नक्षत्र में दुग्धाभिषेक हुआ। शाम को आरती के बाद श्रद्धालुओं को पंगत में पौषबड़ा प्रसादी िवतरित की गई।