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मकान बन रहे दिल्ली वालों के, सड़कें टूट रहीं राजस्थान की
पावटा स्थित जीवन बचाओ आंदोलन के मुख्य संयोजक नित्येंद्र मानव का कहना है कि रोड़ी-बजरी का यह कारोबार पूरी तरह अवैध है। इस बारे में भोपाल स्थित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में वाद दायर किया गया है। ट्रिब्यूनल ने राजस्थान के मुख्य सचिव को खनन प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कराने को कहा है। साथ ही, टोल बूथ पर गुजरने वाले वाहनों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने को भी कहा है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
अवैध रूप से हो रहा सारा काम
अरविंद कुमार/अनिल कौशिक | जयपुर/कोटपूतली
दिल्लीमें बन रहे मकानों की वजह से राजस्थान की सड़कों की सेहत लगातार खराब हो रही है। राज्य से रोजाना दिल्ली जाने वाले रोड़ी-बजरी के 3,000 से ज्यादा ट्रकों ने प्रदेश की 200 किलोमीटर के करीब की सड़कों को पूरी तरह बर्बाद करके रख दिया है। इन सड़कों को दोबारा बनाने पर 200 करोड़ रुपये की ही लागत आएगी।
इन ट्रकों की वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 8 को भी नुकसान पहुंच रहा है और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारी भी इस स्थिति से खासे परेशान हैं। जयपुर जिले की कोटपूतली तहसील के नारेडा, चोटिया, कल्याणपुरा कलां, सुदरपुरा, द्वारिकापुरा, पुरुषोत्तमपुरा, पावना आवीर, भैंसलाना बनेरी बांध समेत एक दर्जन गांवों में करीब 60 स्टोन क्रेशरों से रोजाना 1,000 से ज्यादा ट्रक बजरी लेकर दिल्ली जाते हैं। साथ ही, रोजाना 2,000 से ज्यादा ट्रक रोड़ी लेकर दिल्ली जाते हैं। भारी ट्रकों के आवागमन से इस इलाके की सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और अन्य विभागों के अधिकारी हालात के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। सड़क बनाने वाले कह रहे हैं कि जब तक ओवरलोडिंग नहीं रुकेगी, सड़क बनाने का कोई फायदा नहीं। ट्रैफिक पुलिस कह रही है कि ओवरलोडिंग रोकना उनका काम नहीं। सारे मामले में अब उम्मीद की किरण ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले पर टिकी है, जहां अक्टूबर में अगली सुनवाई होनी है।
एनएचएआईभी परेशान
^रोड़ी-बजरीके ट्रकों के आवागमन से एनएच 8 का कोटपूतली से दिल्ली की तरफ जाने वाला हिस्सा लगातार क्षतिग्रस्त हो रहा है और इस पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। हमनें हाईवे का काम कर रही कंपनी को गड्ढे भरवाने को कहा है। काम चालू हो चुका है और जल्दी पूरा हो जाएगा। सुभाषजानू, परियोजनानिदेशक, एन