एक कमरे में चल रहा है पीसीपीएनडीटी थाना
कन्याभ्रूण हत्या रोकने के लिए आनन-फानन में बनाया गया पीसीपीएनडीटी थाना स्वास्थ्य निदेशालय के एक कमरे में संचालित हो रहा है। महत्त्वपूर्ण रिकार्ड रखने के लिए अलग से तो कमरा ही भ्रूण लिंग जांच में पकड़े जाने वाले आरोपियों के लिए बैरक। कई बार तो एक ही कमरा होने से स्टाफ को बैठने की जगह तक नहीं मिलती। नियमानुसार एक निरीक्षक, एक हैड कांस्टेबल तथा तीन पुरुष एक महिला सिपाही की जरूरत है। मौजूदा हालात में प्रतिनियुक्ति पर आए क्राइम ब्रांच के स्टाफ को नियुक्त कर रखा है। वो ही पूरे राजस्थान के मामलों को निपटाने में लगे हैं।
इनका कहना है...
^पदोंपर नियुक्ति देने सुविधा विकसित करने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा है। जल्दी समस्या का समाधान हो सकेगा। नवीनजैन, मिशननिदेशक (नेशनल हैल्थ मिशन)
मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण ही नहीं
सिंघाना (झूंझुनू) के सेंटर पर निरीक्षण के दौरान पकड़े गए डॉ.योगेश कुमार का राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण नहीं है। इसके बावजूद नरेन्द्र पाल सिंह ने डॉ.योगेश को सोनोलॉजिस्ट के रूप में अधिकृत कर दिया। राजस्थान मेडिकल एक्ट 1952 की धारा 31 के तहत प्रैक्टिस करने के लिए काउंसिल में पंजीकरण कराना आवश्यक है।
कमरे में रखा रिकार्ड।
विधि अधिकारी भी नहीं
कानूनी मामलों में राय देने पैरवी करने के लिए लोक अभियोजक, विधि सलाहकार नहीं होने से ऐसे मामले निपटाने में दिक्कत हो रही है। पीसीपीएनडीटी थाने में लगा स्टाफ अधिकारी ही इधर-उधर जाते रहते हैं।
जेडीएकी तरह कर सकते हैं मर्ज
विशेषज्ञोंके अनुसार चिकित्सा विभाग चाहे तो जेडीए थाने की तरह पीसीपीएनडीटी थाने को भी कमिश्नरेट में मर्ज कर सकता है।