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गुटखे के बाद अब जर्दा खैनी पर लगेगा प्रतिबंध

6 वर्ष पहले
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भास्कर दृष्टिकोण


बाजारमें खुलेआम बिक रहे जर्दा खैनी को भी सरकार अब प्रतिबंधित करने की तैयारी में है। गुटखा बेचने पर पहले ही प्रतिबंध है। अब तंबाकू उत्पादों के सिर्फ बेचने बल्कि निर्माण, स्टोरेज और वितरण पर भी पाबंदी लगेगी। पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने प्रदेश में गुटखे पर पाबंदी लगा दी थी लेकिन जर्दा और खैनी पर पाबंदी स्पष्ट नहीं होने के कारण गुटखा अब भी (सुपारी जर्दा पाउडर की अलग-अलग पैकिंग) बिक रहा है। अब सरकार सभी प्रकार के तंबाकू उत्पादों पर पाबंदी के लिए आदेश जारी करने वाली है। ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। शेष| पेज 6

7000 कैंसर रोगी हर साल राज्य में बढ़ जाते हैं। देश में 80 हजार तक

राजस्थान में गुटखा प्रतिबंध का आदेश जारी होने के बाद महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, मिजोरम सहित आठ राज्यों में भी इन उत्पादों पर पाबंदी लगाई गई। गुटखे के साथ खैनी-जर्दे को भी प्रतिबंध के दायरे में लाया गया।

खुली सिगरेट की बिक्री रोकने के लिए सभी जिला कलेक्टरों को भेजे निर्देश

अतिरिक्तमिशन निदेशक ( एनएचएम) नीरज.के.पवन ने सभी जिला कलेक्टरों को खुली सिगरेट की बिक्री रोकने के लिए पत्र लिखा है। जिला, ब्लॉक स्तर पर तंबाकू नियंत्रण के अंतर्गत गठित टास्क फोर्स के जरिए तंबाकू उत्पाद विक्रेताओं के द्वारा खुली सिगरेट बेचने पर कार्रवाई करें। साथ ही हर माह की जाने वाली कार्रवाई की रिपोर्ट टोबेको कंट्रोल सेल को भेजें।

90% तक घटेगा मुंह का कैंसर तंबाकूउत्पाद मुंह के कैंसर की सबसे बड़ी वजह है। 90 फीसदी मामलों में यही वजह होती है। इससे मस्तिष्क गर्दन का कैंसर भी हो सकता है।

1134 करोड़ रुपए बचेंगे तंबाकूजनित बीमारियों पर खर्च होने वाले 1134 करोड़ रुपए सालाना बचेंगे जो सरकार की तंबाकू से होने वाली आय से अधिक है।

पाबंदी का इंतजार करें, पहल करें

तंबाकूसिर्फ इस्तेमाल करने वाले के लिए, बल्कि पूरे परिवार के लिए खतरे का सबब बनता हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तंबाकू जनित रोगों से देश में एक मिनट में दो मौत हो रही है। बच्चों के लिए हम ही उदाहरण होते हैं। वे हमसे ही सीखते हैं, तो हमें क्यों किसी पाबंदी का इंतजार करना चाहिए। इन उत्पादों के बहिष्कार की पहल हमारे घर से ही क्यों नहीं होनी चाहिए।

{अलग पैकिंगसे बिकते रहे तंबाकूउद्योगों ने गुटखा नहीं बनाकर से सुपारी और जर्दा पाउडर को अलग-अलग पैकिंग में बनाना शुरू कर दिया। ऐसे में गुटखा बंद होकर भी अलग पैकिंग में बिकता रहा।

{18 जुलाई2012 कोगहलोत सरकार ने गुटखे पर पाबंदी लगाने का आदेश जारी किया था, लेकिन आदेश में जर्दा या खैनी को प्रतिबंधित करने के बारे में स्पष्ट रूप से नहीं लिखा था।