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हैल्थ के जॉइंट सैक्रेट्री को भी 48 घंटे में िरपोर्ट नहीं
सेंट्रल जेल में बनाया आइसोलेशन वार्ड
स्वाइनफ्लू के खतरे को देखते हुए जयपुर सेंट्रल जेल में भी विशेष सावधानी बरती जा रही है। जेल अधीक्षक ए.आर. नियाजी ने बताया कि जेल में पृथक से आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। जेल में प्रतिदिन आने वाले बंदियों की डॉ. राजीव सोनी उनकी टीम पहले स्क्रीनिंग कर जांच करती है। बंदी में जुकाम, खांसी या स्वाइन फ्लू के लक्षण नजर आने पर उन्हें आइसोलेशन वार्ड में रखा जाता है। जहां डॉक्टरों की टीम उनकी जांच करती है। ठीक होने पर बंदी को स्थायी बैरक में भेज दिया जाता है।
प्रोफेसरकरेंगे 4 से 6 घंटे तक नियमित राउंड
टास्कफोर्स के अध्यक्ष डॉ.अशोक पानगडिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय किया गया कि फ्लू की प्रभावी रोकथाम के लिए मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर आईसीयू और वार्डों का 4 से 6 घंटे तक नियमित राउंड लेंगे। सभी मेडिकल कॉलेजों में डब्लूएचओ द्वारा फ्लू की जांच उपचार कार्यों के संबंध में जारी दिशा-िनर्देश के आधार पर प्रोटोकॉल तैयार कर सभी मेडिकल कॉलेजों को भेजे जाएंगे। कहा जा रहा है इससे मरीजों का बेहतर इलाज हो सकेगा।
सेंट्रल जेल में बनाया आइसोलेशन वार्ड
स्वाइनफ्लू के खतरे को देखते हुए जयपुर सेंट्रल जेल में भी विशेष सावधानी बरती जा रही है। जेल अधीक्षक ए.आर. नियाजी ने बताया कि जेल में पृथक से आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। जेल में प्रतिदिन आने वाले बंदियों की डॉ. राजीव सोनी उनकी टीम पहले स्क्रीनिंग कर जांच करती है। बंदी में जुकाम, खांसी या स्वाइन फ्लू के लक्षण नजर आने पर उन्हें आइसोलेशन वार्ड में रखा जाता है। जहां डॉक्टरों की टीम उनकी जांच करती है। ठीक होने पर बंदी को स्थायी बैरक में भेज दिया जाता है।
प्रोफेसरकरेंगे 4 से 6 घंटे तक नियमित राउंड
टास्कफोर्स के अध्यक्ष डॉ.अशोक पानगडिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय किया गया कि फ्लू की प्रभावी रोकथाम के लिए मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर आईसीयू और वार्डों का 4 से 6 घंटे तक नियमित राउंड लेंगे। सभी मेडिकल कॉलेजों में डब्लूएचओ द्वारा फ्लू की जांच उपचार कार्यों के संबंध में जारी दिशा-िनर्देश के आधार पर प्रोटोकॉल तैयार कर सभी मेडिकल कॉलेजों को भेजे जाएंगे। कहा जा रहा है इससे मरीजों का बेहतर इलाज हो सकेगा।
स्वाइन फ्लू से सोमवार को आठ मौतें होने के बाद चिकित्सा विभाग के बीमारी को रोकने के दावे पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं। जिससे मौत का आंकड़ा 100 के पार हो गया है। एसएमएस में सीकर के 65 वर्षीय शिवनारायण, चूरू की 65 वर्षीय मूली देवी तथा नागौर की 45 वर्षीय श्रुति की इलाज के दौरान मौत हो गई। जयपुर के एपेक्स अस्पताल में भर्ती 38 वर्षीय रामगोपाल सैनी, प्रताप नगर के नारायणा अस्पताल में नागौर की 17 साल की लीला, आसीन्द के 35 वर्षीय खमन गुर्जर की अजमेर में मौत की पुष्टि हुई है। नीमकाथाना की गर्भवती मालीदेवी को संदिग्ध मानते हुए जयपुर रैफर किया गया था, जिसकी रास्ते में मौत हो गई।
हैल्थ रिपोर्टर| जयपुर
चिकित्साविभागके अधिकारी एसएमएस अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच रिपोर्ट 12 घंटे में देने का दावा कर रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि 48 घंटे में भी रिपोर्ट नहीं मिल रही है। जिसका खमियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
चिकित्सा विभाग के संयुक्त सचिव भी इस देरी का शिकार हो चुके हैं। विभाग के संयुक्त सचिव एमपी वर्मा को 48 घंटे बाद भी स्वाइन फ्लू की जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। वर्मा ने 7 फरवरी को एसएमएस अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए सैंपल दिया था। ्र इसी तरह से जीतू (रजिस्ट्रेशन नंबर 683765) तथा जयपुर निवासी हेमन्त कुमार ने भी 7 फरवरी को सैंपल दिया था, जिसकी रिपोर्ट 48 घंटे में नहीं मिली। इधर, विभाग के अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैंं कि अचानक सैंपल बढ़ने, ऑनलाइन करने तथा आउटसोर्सिग के कारण देरी हो रही है। चिकित्सा विभाग के निदेशक (जनस्वास्थ्य) डॉ.बी.आर.मीणा का कहना है ऐसा कुछ भी नहीं है।
देरतक ठंड स्वाइन फ्लू के लिए जिम्मेदार: जे.पी.नड्डा
केन्द्रीयस्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा ने इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान में हुए कार्यक्रम में स्वाइन फ्लू के लिए इस बार देर तक पड़ रही ठंड को जिम्मेदार माना है। बैठक के दौरान नड्डा ने बताया कि राजस्थान, तेलांगाना, गुजरात में टीम भेजी है। जो बीमारी रोकने के सुझाव दे रहे है। उन्होंने चिकित्सा िवभाग के इतंजामों की जानकारी ली।