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ट्रॉमा सेंटर का सिर्फ फीता कटेगा, अभी इलाज मिल पाना मुश्किल

7 वर्ष पहले
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} अभी इमरजेंसी में 350 एक्स-रे होते हैं। अब ट्रॉमा सेंटर में मरीजों के अलावा आर्थो ओपीडी, वार्ड और प्लास्टर रूम के मरीजों के भी एक्स-रे होंगे। यानी कि 500 एक्स-रे रोजाना। दो मशीनों से इतने एक्स-रे मुश्किल हैं। मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ सकता है।

} प्रवेश गेट के पास ब्लड बैंक बनाया गया है। लेकिन यह काफी छोटा है। इस बारे में अस्पताल प्रशासन को बताया गया है। अब ब्लड बैंक को प्रथम या द्वितीय मंजिल पर बनाया जाएगा। पूर्व से निर्धारित ब्लड बैंक को लाइफ लाइन में तब्दील किया जा सकता है।

} सेंटर में बुधवार रात तक जांच मशीन नहीं लगी। सीटी स्केन और एमआरआई मशीन लगाने के लिए कमरे बनाने का काम चलता रहा। दो दिन में मशीनों को लगा पाना मुश्किल है। कई आवश्यक उपकरण भी नहीं आए।

} ट्रॉमा सेंटर के लिए 99 नर्सिंगकर्मियों की भर्ती की जा चुकी है। लेकिन ये सभी नया स्टाफ है। अब जबकि ट्रॉमा सेंटर में काफी गंभीर घायल मरीज और क्रिटिकल मरीज आएंगे तो उन्हें संभालना और बेहतर उपचार देने के लिए सीनियर स्टाफ को लगाया जाना आवश्यक है।

} प्लास्टर रूम के इंचार्ज ने बताया कि जब तक उनके कमरे में सामान भरा है, वे कोई काम शुरू नहीं कर सकते। इस बारे में उच्चाधिकारियों को भी बता दिया है। प्लास्टर के लिए कमरे में कट्टे रखने हैं और उसके लिए स्लैब भी नहीं लगी है।

ट्रॉमा सेंटर के नोडल इंचार्ज डॉ. नरेन्द्र जोशी से बातचीत

Q.क्याट्रॉमा सेंटर का काम 13 दिसम्बर तक पूरा हो जाएगा?

-हम अपने स्तर पर काम को जल्दी से जल्दी पूरा करना चाहते हैं। उम्मीद है कि यह पूरा हो जाएगा।

Q.क्यामरीजों को 14 दिसम्बर से उपचार मिलना संभव होगा?

-इस बारे में अभी कुछ कह पाना जल्दी होगा, लेकिन हम युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं।

Q.एक्स-रेके कमरे काफी छोटे हैं, इनमें ट्रॉली को घुमा पाना भी मुश्किल होगा?

-हमने नियमानुसार ही इन्हें बनाया है, फिर भी यदि कोई परेशानी है तो इसे दिखवा लेंगे।

Q.सेंटरको शुरू करने की इतनी जल्दी शुरू क्या है?

-यह निर्णय सरकार को करना है।

संदीप शर्मा | जयपुर

सरकारकेएक वर्ष की उपलब्धियों को भुनाने के लिए चिकित्सा विभाग के नुमाइंदे भले ही ट्रॉमा सेंटर के उद्घाटन के लिए दिन-रात एक कर रहे हों लेकिन यह उपलब्धि केवल फीता काटने की रस्म तक सीमित रहनी है। 13 दिसम्बर को प्रदेश के सबसे बडे़ ट्रॉम