- Hindi News
- साढ़े 11 हजार केस एसीबी में आए, पर जांच के लिए अफसर ही नहीं
साढ़े 11 हजार केस एसीबी में आए, पर जांच के लिए अफसर ही नहीं
एसीबीने भले ही पिछले दो साल में एक के बाद एक करके तीन आईपीएस और एक आईएएस अफसर को रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा हो, लेकिन हकीकत यह है कि एसीबी में लोकसेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत लेकर पहुंचे साढ़े 11 हजार लोगों की पिछले 11 माह में कोई सुनवाई नहीं हुई है।
एसीबी के अफसर भ्रष्ट अफसर-कर्मचारियों के खिलाफ ट्रैप की कार्रवाई तो कर रहे हैं, लेकिन जिस मामले में ट्रैप की कार्रवाई नहीं हो रही, उस मामले को या तो एसीबी के अफसर प्राप्त होने वाली शिकायतों के रजिस्टर में दर्ज कर रहे हंै या फिर उन शिकायतों को जांच के लिए संबंधित विभाग के अफसरों के पास भेजा जा रहा है। पिछले 11 माह में एसीबी ने भ्रष्टाचार की 4500 शिकायतें विभागाध्यक्षों के पास भेजी है। 1 जनवरी, 2014 से नवंबर माह तक एसीबी में भ्रष्टाचार की साढ़े 11 हजार शिकायतें आई हैं। इनमें से 7 हजार शिकायतें एसीबी के रिसीव रजिस्टर में दर्ज हैं। यह शिकायतें आईएएस, आईपीएस, आरपीएस और आरएएस सहित अलग-अलग विभागों में तैनात अफसरों कर्मचारियों के खिलाफ हैं।
एसीबी में रोजाना आती हैं 20 शिकायतें
एसीबीमें अफसर-कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें आती हंै तो उसकी जांच के लिए हमारे पास पर्याप्त संख्या में स्टॉफ नहीं है। भ्रष्टाचार की रोजाना की करीब 20 शिकायतें आती हंै। ऐसे में संबंधित विभाग को भेज दी जाती है। उनकी जांच में यदि आरोप साबित हो तो वे मामले को हमारे पास भेज दंे। इसके बाद हम मामला दर्ज कर आरोपी अफसर-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। हमारे पास शिकायतों की जांच करने के लिए स्टाफ की कमी है। सरकार को कई बार पत्र लिखा गया है।
-मनोज भट्ट, डीजी,एसीबी
स्टाफ हो तो एसीबी जांच करे : एसीबीके पास शिकायतों की जांच के लिए पर्याप्त संख्या में स्टाफ नहीं है। एसीबी में एडीजी, आईजी, डीआईजी, एसपी, एडिशन एसपी, डिप्टी एसपी, इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर, सहायक सब इंस्पेक्टर, हैडकांस्टेबल और कांस्टेबल के 207 पद खाली है। इस संबंध में एसीबी के अधिकारियों ने गृह विभाग को पिछले एक साल में 10 से ज्यादा बार पत्र लिख दिया है, लेकिन अभी तक स्टॉफ नहीं मिला है।
एसीबी भ्रष्ट अफसर-कर्मचारियों की शिकायतें जांच के लिए विभागाध्यक्षों के पास तो भेज देते हंै, लेकिन विभाग के अफसर आरोपियों के खिलाफ मिली शिकायत की ना तो जांच करते हंै और ना