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नवंबर से पहले एंटीवेनम इंजेक्शन नहीं मिलेंगे
यदिचिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग समय पर कंपनी को आर्डर दे देता तो प्रदेश में सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोका जा सकता था। कंपनी को समय पर आॅर्डर नहीं दिए जाने की वजह से प्रदेश में सप्लाई नहीं हो सकी और अस्पतालों मेडिकल स्टोर्स में एएसवी इंजेक्शन नहीं बचे। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि स्वास्थ्य विभाग ने कंपनी को 20 जून को आॅर्डर दिए, जिसमें कंपनी से 25000 इंजेक्शन की मांग की गई। कंपनी ने यह माल समय पर चिकित्सा विभाग को दे दिया। दूसरा आर्डर 28 अगस्त को दिया गया।
कंपनी के खरीद आॅर्डर में इस माल को 75 दिन में देने की बात कही गई है। अब जबकि कंपनी को 75 दिन में माल तैयार कर देना है तो राजस्थान में अगली खेप नवंबर माह में पाएगी। शेष| पेज 4
यदियह आर्डर पहले दिया जाता तो माल की पूर्ति हो सकती थी।
अब सरकार और चिकित्सा विभाग के पास अन्य प्रदेशों से ही इंजेक्शन खरीद का विकल्प बचा है। लेकिन अन्य प्रदेशों में भी सरकार बहुत अधिक इंजेक्शन की डिमांड नहीं रखती सो वहां से भी पर्याप्त मात्रा में इंजेक्शन मिल पाना काफी मुश्किल होगा।
पहले देना था आर्डर चिकित्सा विभाग को
बारिश के सीजन में सर्पदंश के अधिक केस होते हैं। ऐसे में विभाग को पहले ही आर्डर करने थे। अब जबकि कंपनी 75 दिन में माल देती है तो विभाग को जून या जुलाई माह में ही आर्डर देना था।
करार तोड़ा सरकार ने
सरकार और कंपनी के बीच 662 रुपए प्रति एएसवी इंजेक्शन का सौदा तय हुआ। साथ ही कंपनी को 75 दिन में डिलीवरी देना भी शर्तों में था। इसके अलावा पैकिंग, नाम आदि पर भी तय हुए। लेकिन बाद में सरकार ने 436.51 रुपए प्रति इंजेक्शन देने की बात कही। यह इसलिए हुआ कि इंजेक्शन तरल और पाउडर के रूप में आता है। सरकार का कहना था कि तरल इंजेक्शन के 662 रुपए तय हुए जबकि इंजेक्शन को पाउडर में दिया जा रहा है। लेकिन शर्तों में इसे दोनों तरह से देना था।
अन्य प्रदेशों से कम है कंपनी की कीमत
कंपनी ने प्रति इंजेक्शन की कीमत 662 रुपए तय की है। यह इंजेक्शन महाराष्ट्र में 687 रुपए, केरल में 733 रुपए, छत्तीसगढ़ में 750 रुपए, मध्यप्रदेश में 748 रुपए और दिल्ली में 785 रुपए में अन्य कंपनियां उपलब्ध करा रही हैं।
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