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शहर के यंग एंटरप्रिन्योर्स ने तैयार किया ई-बैग। भारी भरकम बैग से स्कूल के बच्चों को मिलेगा छुटकारा।

6 वर्ष पहले
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स्मार्ट क्लासेस के बाद ई-बैग की बारी

e bag

सिटी रिपोर्टर } जयपुर

स्मार्ट क्लासेस में इंटरएक्टिव तरीके से पढ़ाई के बाद भारी-भरकम बैग का बोझ कम करना संभव होगा। बच्चों को स्कूल में सभी सब्जेक्ट्स की कॉपी किताब लेकर जाने की जरूरत नहीं।

(इलेक्ट्रॉनिक बुक) ई-बुक की तर्ज पर तैयार ‘ई-बैग’ नोट बुक को रिप्लेस करके बस्तों का बोझ करेगा कम। साथ ही टेक्स्ट बुक मैन्यूफैक्चरिंग के लिए लाखों पेड़ों को नष्ट होने से बचाया जा सकेगा। 450 केजी के इस गैजेट को आवश्यकतानुसार 32 जीबी मेमोरी तक एक्सपेंड किया जा सकेगा।

शहर के तीन एंटरप्रिन्योर्स राजेश सिंघल, अक्षय गोयल रवि शर्मा ने मिलकर ई-बैग तैयार किया है। स्कूल के स्टूडेंट्स से लेकर रिसर्च स्कॉलर्स तक इस गैजेट को यूज कर सकेंगे। पहली से बारहवीं क्लास तक सिलेबस इंस्टॉल करना संभव होगा। जिससे ये कॉपियों किताब दोनों को रिप्लेस करेगा। जल्दी ही मार्केट में उपलब्ध होगा।

ई-बैग से फायदा

>स्टेशनरी मैन्यूफैक्चरिंग के लिए काटे जाने वाले लाखों पेड़ बचाए जा सकेंगे।

> हैवी बैग्स का बोझ होगा रिड्यूस।

> कॉपियों किताबों को करेगा रिप्लेस।

> साल भर स्टेशनरी पर लगने वाले लागत में कटौती होगी।

> गैजेट के स्क्रीन लाइट से स्टूडेंट्स के आंखों पर निगेटिव इफेक्ट नहीं।

खासफीचर्स

>4 जीबी इंटरनल मेमोरी है।

> लिखने के लिए 9.7 इंच की स्क्रीन पर्याप्त है।

> एक बार चार्ज करने के बाद करीब 4 हफ्तों तक यूज कर सकेंगे।

> 450 किलोग्राम वजन है।

> ये डिवाइस फ्लेक्सिबल है। किनारे रबड़ से बने हैं, जिससे गिरने पर टूटने की संभावना कम हो जाती है।

> वॉटर प्रूफ डिवाइस है।