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काश! मेरे बच्चे का दिल भी किसी में धड़कता

6 वर्ष पहले
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सोमवार को भास्कर टीम मोहित के माता-पिता से मिलने तिलवाड़ पहुंची। मोहित के माता-पिता ने कहा : अस्पताल में बेटे के इलाज के दौरान जब दूसरे गंभीर मरीजों को देखा तो मन विचलित हो गया। बेटे की मौत के बाद फैसला किया-अगर किसी का भला मेरे बेटे के मृत शरीर से हो सकता है, तो इससे अच्छा क्या होगा। हालांकि, रिश्तेदारों ने विरोध किया। बाद में सभी इस अहसास पर माने कि चलो मोहित कहीं किसी के शरीर में तो जिंदा रहेगा। महात्मा गांधी अस्पताल में अतिरिक्त निदेशक मिशन एन एचएम नीरज के पवन ने मोहित के इलाज पर खर्च हुए 70 हजार रुपए लौटाने की पेशकश भी परिजनों को की, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। अस्पताल के डॉ. टी.सी.सदासुखी ने बताया- मोहित की उम्र कम होने की वजह से उसकी दोनों किडनियां एक ही शख्स को लगाई गईं। यह इस तरह का देश में 23वां मामला है।

मां बोली- मैंने डॉक्टरों से कहा था-मेरा बेटा जितनों के काम आए, उतना अच्छा

शंभूदयालव्यास | टहला, अलवर, जयपुर

कौनकहता है मेरा बेटा नहीं रहा? वह उनके अंदर जिंदा है, जिन्हें उसकी किडनी और लिवर दिए गए। अफसोस यह है कि उसका दिल किसी के काम नहीं आया। काश! वह भी किसी में धड़कता। यह कहना है राज्य के पहले ब्रेन डैड डोनर मोहित की मां का। छह साल के मोहित के लिवर और किडनी से हाल ही दो लोगों को नई जिंदगी दी गई है। अलवर से 68 किमी दूर तिलवाड़ गांव में रहने वाले कल्याण सहाय शर्मा का छह साल का बेटा मोहित 30 जनवरी की शाम चारा काटने वाली मशीन के इंजन के पहिए की चपेट में गया था। तमाम कोशिशों के बावजूद बचाया नहीं जा सका। छह फरवरी को डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डैड घोषित कर दिया था। (पेज2 भी पढ़ें)

परिजनों की सहमति के बाद मोहित के शरीर से लिवर और किडनी लिए गए थे। महात्मा गांधी अस्पताल के डॉक्टर्स के अनुसार-अभी जयपुर में तो हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए मरीज था और ही ऐसे स्पेशलिस्ट। ऐसे में मोहित का दिल नहीं लिया गया।