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प्रभाव और परिवारवाद से निगम में एवजी सफाई सिस्टम

6 वर्ष पहले
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शहरकीसफाई सुधार में एवजी का जुड़ाव कैसे हुआ, यह जानने के लिए सोमवार को भास्कर ने जब रिटायर्ड सफाई कर्मचारियों एसआई सीएसआई से बात की।

इन लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि शहर की सफाई सुधार का काम देख रहे निगम हैल्थ कमिश्नर, हैल्थ आफिसर, मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक और स्वास्थ्य निरीक्षकों को मालूम है कि एवजी काम कर रहे हैं। लेकिन जिन लोगों के एवज में ये कर्मचारी लगे हैं उनके प्रभाव अथवा परिवार से जुड़ाव होने के कारण वे इन्हें रोक नहीं पा रहे हैं। एवजी जिन लोगों की जगह काम कर रहे हैं वे या तो निगम में सफाई कर्मचारी यूनियन से जुड़े हैं। अथवा जमादार, एसआई या सीएसआई के रिश्तेदार हैं। उनके प्रभाव के कारण ही कई सालों से एवजी सिस्टम चल रहा है। पहले ऐसे कर्मचारियों की संख्या 50 के करीब थी लेकिन अब वह 500 से ज्यादा हो गई है। निगम के अफसरों को सिर्फ काम से मतलब है, वह चाहे कोई भी करे। कई वार्ड में तो सफाई कर्मचारी बुजुर्ग हैं अथवा अस्वस्थ हैं। इनकी जगह उनके परिवार का ही कोई सदस्य उसके एवज में काम कर रहा है। जिन सफाई कर्मचारियों ने अपने स्थान पर किराए के कर्मचारी लगा रखे हैं। निगम ने ऐसे कर्मचारियों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। हैल्थ कमिश्नर सांवरमल मीणा ने बताया कि प्रत्येक जोन के हर वार्ड में स्थाई कर्मचारियों की उपस्थिति की जांच करवाई जा रही है।