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20 साल में पहली बार कांग्रेस को मिली हर क्षेत्र में मात
पंचायतीराजचुनाव इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुए। भाजपा ने कांग्रेस को हर क्षेत्र में मात दी। बीस साल में पहली बार हुआ कि भाजपा ने गांवों में अपना जनाधार बढ़ाया। एक साल में हुए पिछले तीन चुनावों को आंकड़ों का एनालिसिस करके कांग्रेस भले ही खुश हो रही हो कि पंचायत चुनाव उनके लिहाज से अच्छा रहा। लेकिन असलियत में कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ है। पहली बार भाजपा गांवों में कांग्रेस पर भारी पड़ी।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी आंकड़ों में जिला प्रमुख, प्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव में भाजपा को सर्वाधिक सीटें मिलीं। वहीं, कुल मत प्रतिशत के मामले में भी भाजपा ने कांग्रेस को काफी पीछे छोड़ दिया।
भाजपा ने पंचायत समिति चुनाव में 43.62 फीसदी मत प्राप्त किए, जबकि कांग्रेस को केवल 40.70 फीसदी पर ही संतोष करना पड़ा। यही हाल जिला परिषद के चुनाव में रहा। इस चुनाव में भाजपा को 47.43 फीसदी मत प्राप्त हुए जबकि कांग्रेस 43.44 फीसदी मत ही प्राप्त कर सकी। हालांकि, पिछले एक साल में हुए तीन चुनावों के लिहाज के मतों का अंतर बेहद कम हैं। कांग्रेस इसी को भुना रही है।
पहली बार भाजपा ने किया 500 का आंकड़ा पार
इसबार के चुनाव में भाजपा ने जिला परिषद के कुल सदस्यों के मामले में पहली बार 500 का आंकड़ा पार किया। भाजपा के 590 सदस्यों को जीत मिली। कांग्रेस के पिछले 20 सालों में इस बार सबसे करारी मात मिली। उसके केवल 395 सदस्य मिले। जो 20 साल में सबसे कम हैं। वर्ष 2010 के चुनाव में कांग्रेस को जिला परिषद की 603 सीटें मिली थी।
जिलापरिषद सदस्यों की वर्षवार स्थिति
वर्ष भाजपा कांग्रेस
1995413 478
2000 365 584
2005 459 494
2010 365 603
2015 590 395
प्रधानों के मामले में कांग्रेस ने दी टक्कर
पंचायतचुनाव के दौरान भी भाजपा का असर देखने को मिला। इसके बावजूद कांग्रेस के प्रधानों की संख्या 118 तक पहुंच गई। भाजपा को उसे कड़ी टक्कर मिली, लेकिन भाजपा ने भी सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले। भाजपा के 163 प्रधान चुने गए। जीतने वाले प्रधानों की इतनी संख्या पिछले पांच चुनावों में कांग्रेस की भी नहीं रही।
प्रधानोंकी स्थिति
वर्ष भाजपा कांग्रेस
1995119 86
2000 69 146
2005 124 90
2010 72 159
2015 163 118
प्राप्त मत प्रतिशत में
वर्षभाजपा कांग्रेस
199538.56 42.34
2000 42.14 44.50
2005 43.41 45.35
2010 40.91 46.35
आधे रह गए कांग्रेस के जिला प्रमुख
भाजपाके 2010 में केवल 8 जिला प्रमुख थे। जो 2015 में बढ़कर 21 तक पहुंच गए। कांग्रेस के जिला प्रमुखों की संख्या आधी रह गए। वर्ष 2010 में कांग्रेस के जिला प्रमुख 24 थे, जो इस बार के चुनाव में आधे यानी 12 रह गए। यूं तो कांग्रेस दहाई के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच पाती, अगर अलवर नागौर में भाजपा में क्रॉस वोटिंग नहीं होती और झुंझुनूं में निर्दलीय कांग्रेस की मदद नहीं करता। यही वजह रही कि नौ में बहुमत हासिल करने वाली कांग्रेस के 12 जिला प्रमुख चुने गए।
जिलाप्रमुखों की स्थिति
वर्ष भाजपा कांग्रेस
199519 12
2000 10 19
2005 16 13
2010 8 24
2015 21 12
पंस सदस्य 14 प्रतिशत बढ़े
प्रदेशमें 2010 में 5275 में से भाजपा के 1810 सदस्य चुने गए, जो 34.31 फीसदी थे। जबकि कांग्रेस के 2585 सदस्य चुने थे जो 49 फीसदी थे। इस चुनाव में भाजपा के कुल 6236 में से भाजपा सदस्यों की संख्या 14 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 48.39 फीसदी पर पहुंच गए। कांग्रेस के सदस्यों की संख्या घटकर 40.63 फीसदी पर गई।
पंचायत समिति सदस्यों की वर्षवार स्थिति
वर्ष भाजपा कांग्रेस
19951990 2035
2000 1818 2549
2005 2203 2309
2010 1810 2585
2015 3018 2534