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थिएटरखुद को अभिव्

7 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर ‘जयरंगम’के तहत आयोजित हुई इस तीन दिवसीय नुक्कड़ प्रतियोगिता का बुधवार को समापन हुआ। इसमें शहर के युवा कलाकारों ने पर्यावरण सुरक्षा, नारी उत्पीड़न, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। प्रतियोगिता के दौरान शहर के 15 स्कूल और 7 कॉलेजों के स्टूडेंट्स ने विभिन्न नुक्कड़ खेले। प्रतियोगिता के अंतिम दिन अल्फा बीटा स्कूल, सुबोध पब्लिक स्कूल, कैंब्रिज कोर्ट, एसवीएम स्कूल, महारानी कॉलेज, राजधानी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के स्टूडेंट्स ने भाग लिया। प्रतियो
थिएटरखुद को अभिव्यक्त करने का माध्यम है। थिएटर के माध्यम से एक्टर या डायरेक्टर जो भी बात लोगों तक पहुंचाना चाहते उसका वहां तक पहुंचना बहुत जरूरी होता है। फिल्मों से पहले मैंने थिएटर किया। पन्ना में इप्टा ग्रुप के साथ जुड़ने के बाद एनएसडी का पता चला। एनएसडी करने के बाद मुंबई गया। हालांकि मेरे जीवन में संघर्ष तो बचपन से ही रहा, लेकिन मुंबई जाने के बाद तक भी चलता रहा। संघर्ष के दिनों में मुंबई में ऐसा वक्त भी गुजारा जहां एक ही कमरे में दस-दस जने रहते थे। कई-कई दिनों तक बिना खाना खाए गुजारे।

अगर लोग मुझे याद रखेंगे तो शायद ‘फंस गए ओबामा’ के लिए, जिसमें मैंने एक टीचर का किरदार निभाया था। मैं साल में एक प्ले जरूर करता हूं। अगर उसमें एक्ट नहीं करता तो उसके म्यूजिक या डायरेक्शन पर काम करता हूं। उसके बाद मुझे सोनी चैनल पर प्रसारित सीरियल ‘युद्ध’ में अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का मौका मिला, जो मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। इस शो में मुझे बच्चन साहब को डांटना और मारना था। इश्तियाक ने अपने अपकमिंग प्रोजेक्ट के बारे में बताया कि जल्द ही वे ‘डॉली की डोली’ में नजर आएंगे।

नाटक का कथानक

छोटेसे गांव के कुछ बेरोजगार युवा मिल कर ‘ओमकारा’ फिल्म देखने जाते हैं। फिल्म से प्रभावित होकर वे इसे दुबारा बनाने की सोचते हैं। जब फिल्म बनाने लगते हैं तो उन्हें एहसास होता है कि यह इतना आसान नहीं है। ऐसे में भोले जो पहले थिएटर के बारे में अनभिज्ञ था, वो महसूस करता है कि ओमकारा तो शेक्सपीयर के नाटक ‘ओथेलो’ का अडेप्टेशन है। इस पर वे एक बार फिर से नाटक तैयार करने की मंशा करते हैं। बस इस ताने-बाने को लेकर उनके बीच रंजिश, ईर्ष्या, द्वेष के भाव उत्पन्न होते हैं क्योंकि हर कोई ‘ओमकार’ के अजय देवगन और सैफ अली खान का किरदार ही खुद के लिए चुनना चाहता है। यही हास्य का माहौल बनाता है।

jairangam

‘द शैडो ऑफ ओथेलो’ में बेरोजगारों की कहानी

अभिव्यक्ति का माध्यम है थिएटर: इश्तियाक

नुक्कड़ नाटकों से दिया जागरूकता का संदेश