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हास्य और संवेदनाओं में \"अभियुक्त\'

7 वर्ष पहले
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कहानीमें एक बिजनेस एग्जिक्यूटिव धनंजय रात के वक्त रास्ते में गाड़ी खराब होने से फंस जाता है। पास में हवेली देख रात बिताने के लिए वो हवेली में आश्रय लेने पहुंचता हैं, जहां चार रिटायर्ड पुरुष एक-दूसरे के साथ मजाक के मूड में बैठे होते हैं। धनंजय जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कई अमानवीय कार्य पूर्व में कर चुका होता है वो जिस हवेली में आश्रय लेने जाता है, वो एक जज की होती है। चार दोस्त मिलकर नशे के हाल में धनंजय के साथ गेम खेलते हैं और इस खेल ही खेल में उसके जीवन के उन सभी अनछुए पहलुओं से वाकिफ हो जाते हैं, जिसे सिर्फ धनंजय ही जानता था। खेले -खेल में मुकदमा चलाया जाता है।

मोरल: सफलताकी सीढ़ी अमानवीय राहों पर चलकर प्राप्त तो की जा सकती है, पर उन अमानवीय राहों पर चलते वक्त हम जो भी कर्म कर बैठते हैं, वो ता-जिंदगी हमारा पीछा नहीं छोड़ती।

jai rangam